जयपुर–दिल्ली नेशनल हाईवे (NH-48) पर रविवार रात कोटपूतली–बहरोड़ जिले के पावटा कस्बे में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब केमिकल से भरे एक टैंकर और ट्रेलर के बीच भीषण भिड़ंत हो गई। हादसा इतना भयावह था कि टक्कर के तुरंत बाद टैंकर में भरा केमिकल करीब 1 किलोमीटर तक सड़क पर फैल गया और चंद ही मिनटों में दोनों वाहनों में आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और पावटा उप जिला अस्पताल के पास से लेकर खार नली पुलिया तक लगभग 400 मीटर क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया।
गनीमत यह रही कि हादसे के समय दोनों वाहनों के चालक सतर्कता दिखाते हुए समय रहते बाहर निकल आए, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि, केमिकल रिसाव और आग की तीव्रता के कारण हाईवे पर लंबा जाम लग गया और कई किलोमीटर तक वाहनों की कतारें लग गईं। यात्रियों को घंटों तक परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रागपुरा थानाधिकारी भजनाराम चौधरी ने बताया कि रविवार रात करीब 8:30 बजे जयपुर से दिल्ली की ओर जा रहा केमिकल से भरा टैंकर पावटा बस स्टैंड के पास अचानक बेकाबू हो गया। इसी दौरान जयपुर की ओर आ रहे ट्रेलर से उसकी जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि टैंकर का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया और उसमें भरा खतरनाक केमिकल सड़क पर बहने लगा।
कुछ ही पलों में केमिकल ने आग पकड़ ली और दोनों वाहनों में लपटें उठने लगीं। हवा के साथ आग फैलती गई और हाईवे का बड़ा हिस्सा आग की चपेट में आ गया। आसपास के क्षेत्र में धुएं का गुबार छा गया, जिससे लोगों में दहशत फैल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के बाद टैंकर से निकला केमिकल करीब 1 किलोमीटर तक सड़क पर फैल गया। यही केमिकल आग को तेजी से फैलाने का कारण बना। आग इतनी तेजी से फैली कि पावटा उप जिला अस्पताल के पास से खार नली पुलिया तक लगभग 400 मीटर का इलाका इसकी चपेट में आ गया।
आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि दूर से ही दिखाई दे रही थीं। आसपास के दुकानदारों और राहगीरों में भय का माहौल बन गया। लोगों ने सुरक्षित दूरी बनाए रखी और पुलिस को सूचना दी।
हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत जयपुर–दिल्ली नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक रोक दिया। दोनों ओर से वाहनों को रोक दिया गया, ताकि किसी अन्य दुर्घटना की आशंका न रहे। हाईवे बंद होने के कारण कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया।
बसों, ट्रकों, कारों और अन्य वाहनों में फंसे यात्रियों को काफी परेशानी हुई। कई लोग घंटों तक अपने वाहनों में ही बैठे रहे। कुछ यात्रियों ने वैकल्पिक मार्गों का सहारा लिया, लेकिन अधिकांश को आग बुझने और सड़क साफ होने का इंतजार करना पड़ा।
आग की विकरालता को देखते हुए पावटा फायर ब्रिगेड ने तुरंत मोर्चा संभाला। फायर इंचार्ज धर्मेंद्र यादव ने बताया कि शुरुआती प्रयासों में आग पर काबू पाना मुश्किल साबित हुआ। इसके बाद कोटपूतली, बहरोड़, बानसूर, शाहपुरा, विराटनगर, जयपुर और चौमूं से दमकल गाड़ियों को बुलाया गया।
कुल 14 दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया। दमकल कर्मियों को केमिकल आग होने के कारण विशेष सावधानी बरतनी पड़ी। लगातार पानी और फोम का छिड़काव किया गया।करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।
हादसे की सूचना मिलते ही कोटपूतली–बहरोड़ जिला कलेक्टर प्रियंका गोस्वामी भी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ली। कलेक्टर ने राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए और यह सुनिश्चित किया कि किसी भी प्रकार की जनहानि न हो।
इस हादसे में सबसे राहत की बात यह रही कि दोनों वाहनों के चालक समय रहते बाहर निकल आए। टक्कर के तुरंत बाद आग लगने से पहले ही दोनों ड्राइवर सुरक्षित दूरी पर पहुंच गए। यदि कुछ सेकंड की भी देरी होती, तो बड़ा हादसा हो सकता था।
हाईवे बंद होने के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई किलोमीटर तक वाहनों की कतारें लग गईं। कुछ यात्री अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग तलाशते नजर आए, जबकि कुछ को पूरी रात इंतजार करना पड़ा।
बसों में सवार यात्रियों ने बताया कि उन्हें पानी और भोजन की समस्या का सामना करना पड़ा। हालांकि, पुलिस और प्रशासन की ओर से स्थिति सामान्य होने के बाद ट्रैफिक को धीरे-धीरे बहाल किया गया।आग बुझने के बाद सड़क पर फैले केमिकल को साफ करने में भी काफी समय लगा। प्रशासन ने विशेष टीम लगाकर हाईवे को साफ कराया। इसके बाद ही ट्रैफिक को आंशिक रूप से बहाल किया गया।


