बाड़मेर। शिव विधानसभा क्षेत्र के हरसाणी गांव में लंबे समय से पानी की समस्या को लेकर बुधवार को शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने बाड़मेर जलदाय कार्यालय में धरना प्रदर्शन किया। विधायक पहले कार्यालय में कुर्सी पर बैठे थे, लेकिन जब अधिकारियों से पानी की समस्या का समाधान नहीं मिला, तो उन्होंने कुर्सी छोड़कर सीधे जमीन पर बैठने का फैसला किया और अधिकारियों के सामने अपनी मांग दोहराई।
हरसाणी गांव में पिछले एक साल से पीने के पानी की कमी बनी हुई है। गांव की आबादी लगभग 10 हजार है और ग्रामीण लंबे समय से जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन की समस्या को लेकर परेशान हैं। लोगों का आरोप है कि स्वीकृत लेआउट के अनुसार पाइपलाइन नहीं बिछाई गई, कई जगह मनमाने ढंग से रास्ता बदला गया और ठेकेदार तथा अधिकारी मिलीभगत कर सरकारी धन का दुरुपयोग कर रहे हैं। ग्रामीणों को पर्याप्त पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है, जिससे लोगों ने सड़कों पर धरना और रैली निकाली। बुधवार को गांव में बाजार भी बंद रहे।
विधायक भाटी ने कहा कि “गांव के लोग पानी के लिए सड़क पर बैठे हैं। मैं एक साल से लेटर लिख रहा हूं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। जब हमारे लोग परेशान हैं तो यह हमारे लिए शर्म की बात है। अब मैं अधिकारी के सामने धरने पर बैठ रहा हूं।” उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट रूप से कहा कि लिखित जवाब देना होगा कि पानी कब तक पहुंचेगा, और यदि समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे आगे भी कार्रवाई करेंगे।

इस दौरान अतिरिक्त मुख्य अभियंता (एईएन) परशुराम वर्मा और विधायक के बीच बातचीत हुई। अधिकारी लगातार उन्हें कुर्सी पर बैठने के लिए कह रहे थे, लेकिन विधायक भाटी ने अपनी मांग पर अड़े रहते हुए धरने की स्थिति में ही संवाद जारी रखा।
भाटी ने अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि “पाइपलाइन नहीं बिछाई जा रही है और हमारे लोगों को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। अगर सालभर में पानी नहीं दिया जा सकता तो मैं आज यहां धरने पर बैठा हूं। हमारी आंखों के सामने जनता पानी के लिए परेशान है, इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”
वहीं अधिकारी हाथ बंधे खड़े नजर आए और विधायक की मांग पर तत्काल कार्रवाई करने का आश्वासन नहीं दे सके। विधायक भाटी के धरने से बाड़मेर में जल आपूर्ति व्यवस्था में खामियों और भ्रष्टाचार की जांच पर ध्यान केंद्रित करने की संभावना बढ़ गई है।
हरसाणी गांव के लोग लगातार जल संकट से जूझ रहे हैं और अब यह मामला स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों के लिए चुनौती बन गया है।


