भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच संपन्न हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) देश की वैश्विक व्यापार रणनीति में एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में हुआ यह समझौता भारत को 27 यूरोपीय देशों के साथ एक सशक्त और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी से जोड़ता है। इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर “मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स” कहा जा रहा है, जो भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति और कूटनीतिक प्रभाव को दर्शाता है।
इस फ्री ट्रेड डील के तहत भारतीय उत्पादों को यूरोपीय यूनियन के बाज़ारों में अभूतपूर्व तरजीह मिलेगी। समझौते के अनुसार भारत के 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात योग्य उत्पादों को आसान और प्रतिस्पर्धी बाज़ार पहुंच मिलेगी। इससे टेक्सटाइल, लेदर, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा और देश में करोड़ों नए रोज़गार के अवसर सृजित होने की संभावना है।
कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में भी यह समझौता किसानों के लिए लाभकारी साबित होगा। भारतीय कृषि उत्पादों को यूरोप के बड़े बाज़ारों में सीधी पहुंच मिलने से किसानों की आय में वृद्धि होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही, यह एफटीए स्टार्टअप्स, एमएसएमई और निर्यातकों के लिए भी नए अवसरों के द्वार खोलेगा।
समझौते में शामिल भविष्य-उन्मुख मोबिलिटी फ्रेमवर्क के माध्यम से कुशल और अर्ध-कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए यूरोपीय देशों में रोजगार और करियर के नए अवसर उपलब्ध होंगे। इससे न केवल मानव संसाधन का वैश्विक विस्तार होगा, बल्कि भारत की सॉफ्ट पावर भी और सशक्त बनेगी।


