राजस्थान के सबसे बड़े रणथंभौर टाइगर रिजर्व से एक बार फिर रोमांचक और उत्साहजनक खबर सामने आई है। प्रसिद्ध बाघिन टी-107 सुल्ताना आज सुबह त्रिनेत्र गणेश मार्ग स्थित मिश्रदर्रा के पास अपने नन्हे शावकों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर शिफ्ट करते हुए देखी गई। बाघिन ने अपने शावकों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें मुंह में दबाकर जंगल की ओर ले जाते हुए देखा गया। इस दृश्य ने वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ा दी।
वन विभाग के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि बाघिन सुल्ताना ने इस बार दो शावकों को जन्म दिया है। हालांकि यह भी संभव है कि उसने दो से अधिक शावकों को जन्म दिया हो। फिलहाल शावकों की संख्या और सुरक्षा पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि बाघिन और उसके शावकों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके।
रणथंभौर की यह प्रसिद्ध बाघिन टी-107 सुल्ताना, टी-39 नूर की बेटी है। टी-39 नूर भी रणथंभौर में कई शावकों को जन्म दे चुकी थी और सुल्ताना उसकी चौथी संतान है। सुल्ताना तीसरी बार मां बनी है, इससे पहले पहले और दूसरे लीटर में उसने तीन-तीन शावकों को जन्म दिया था। डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि रणथंभौर टाइगर रिजर्व में अब बाघ, बाघिन और शावकों की कुल संख्या 73 हो चुकी है, और वन विभाग संरक्षण और निगरानी के प्रयास लगातार जारी रखे हुए हैं।
बाघिन के शावकों को शिफ्ट करने के दौरान सुरक्षा के कारण त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग को श्रद्धालुओं के लिए कुछ समय के लिए बंद किया गया। डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि शिफ्टिंग पूरी होने और बाघिन के जंगल की ओर लौटने के बाद मार्ग को दोबारा खोल दिया गया। यह कदम बाघिन और उसके शावकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया।
रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघिन सुल्ताना और उसके शावकों की गतिविधियों को वन विभाग लगातार ट्रैक कर रहा है। वन विभाग का कहना है कि पर्यटकों और श्रद्धालुओं से आग्रह है कि वे जंगल और बाघिन के आसपास सुरक्षित दूरी बनाए रखें और शोर-शराबे से बचें। इस घटना ने न केवल वन्यजीव प्रेमियों बल्कि पूरे राज्य में खुशी और उत्साह का माहौल पैदा कर दिया है।


