राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने शुक्रवार को राजस्थान विश्वविद्यालय परिसर में दृश्यकला विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय महिला लोक कला शिविर का शुभारंभ किया।
राज्यपाल ने इस दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आई कलाकारों से संवाद भी किया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने हमारी हस्तकलाओं, चित्रकला आदि से जुड़े कुटीर और घरेलू उद्योग बंद किए। उन्होंने महात्मा गांधी का संदर्भ देते हुए कहा कि घरेलू उद्योग बंद कर लोगों को भूखे रहने पर इसलिए मजबूर किया गया कि देश की संस्कृति को जड़ से समाप्त कर दिया जाए और लोग सदा गुलाम बने रहें।
राज्यपाल ने कहा कि अंग्रेजों को यह बात मालूम नहीं थी कि कपास से कपड़ा बनता है। भारत में आकर उन्होंने यह जाना। उन्होंने अजंता की चित्रकला का उल्लेख करते हुए कहा कि सातवीं सदी में हमारे यहां जहाज के चित्र मिले हैं। हमारे यहां ऐसी कलाकृतियां बनती थी, जिनके रंग कभी फीके नहीं पड़ते थे। उन्होंने कहा कि भारतीय कलाओं से प्रेरणा लेकर ही पश्चिम के देशों ने बहुत से आविष्कार किए, हमारी कला और कारीगरी को लूट ले गए पर हमारे पारंपरिक कलाकारों ने कलाओं को सदा जीवित रखा है। इसलिए पारंपरिक कलाओं को प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि लोक कलाएं और शिल्प स्थान विशेष की संस्कृति और जीवन को प्रतिबिंबित करते हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान कलाओं का गढ़ रहा है। उन्होंने महिला चित्रकला और शिल्प शिविर को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसे कला शिविर पारंपरिक कलाओं के संरक्षण के साथ इनसे जुड़ी आधुनिक कला दृष्टि से विद्यार्थियों को जोड़ते हैं।
कार्यक्रम के आरम्भ में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने राष्ट्रीय महिला कला शिविर का विधिवत उद्घाटन किया। उन्होंने कला शिविर के अंतर्गत लगाए गए लोक कला स्टॉल का भी अवलोकन किया। उन्होंने बिहार, ओडिसा, पश्चिम बंगाल आदि से आए लोक कलाकारों की कला के बारे में भी जानकारी ली। कला शिविर में देश के विभिन्न राज्यों की 32 महिला कलाकार भाग ले रहीं हैं।


