जयपुर में मकर संक्रांति का पर्व पूरे उत्साह, उल्लास और परंपरागत रंग में मनाया गया। सुबह से ही गुलाबी शहर का आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर गया। खासतौर पर परकोटा क्षेत्र में पतंगबाज़ी का जुनून चरम पर रहा। छतों पर सुबह से शाम तक लोग पतंग उड़ाते नजर आए और चारों ओर ‘वो काटा… ये कटा’ के शोर से माहौल गूंजता रहा।
त्योहार को लेकर बापू बाजार, जौहरी बाजार, किशनपोल, चौड़ा रास्ता और त्रिपोलिया बाजार सहित परकोटा के इलाकों में खास रौनक देखने को मिली। वहीं मानसरोवर, मालवीय नगर, जगतपुरा, वैशाली नगर और विद्याधर नगर जैसे शहर के अन्य हिस्सों में भी लोगों ने बढ़-चढ़कर पतंगबाजी में हिस्सा लिया। पतंग, मांझा और खानपान की दुकानों पर दिनभर भीड़ लगी रही। तिल-गुड़ से बने पारंपरिक व्यंजनों की जमकर खरीदारी हुई।
जलमहल की पाल, आमेर और नाहरगढ़ में सामूहिक पतंगबाज़ी का आकर्षक नजारा देखने को मिला, जहां बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटकों ने भी इस पर्व का आनंद लिया। शाम ढलते ही शहर में आतिशबाजी शुरू हो गई, जो देर रात तक चलती रही। कुल मिलाकर मकर संक्रांति का पर्व जयपुर में उल्लास और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक बना रहा।
हालांकि, उत्सव के बीच हादसों ने भी चिंता बढ़ा दी। शहर में पतंगबाजी के दौरान मांझे से 150 से अधिक लोग घायल होकर विभिन्न अस्पतालों में पहुंचे। कई लोग छतों से गिरने के कारण फ्रैक्चर का शिकार हुए। एसएमएस हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर में शाम 6 बजे तक 32 घायल पहुंचे, जिनमें 12 की हालत गंभीर होने पर भर्ती किया गया। जयपुरिया अस्पताल में करीब 50, आरयूएचएस में 20 और गणगौरी अस्पताल में 14 घायल पहुंचे।
वीकेआई निवासी अनिल कुमार बाइक से जा रहे थे, तभी अचानक गर्दन पर मांझा लग गया। गंभीर रूप से घायल अनिल को एसएमएस अस्पताल में टांके लगाए गए। वहीं वैशाली नगर बजरी मंडी निवासी 9 वर्षीय परी छत से गिर गई, जबकि शास्त्री नगर निवासी 5 वर्षीय रौनक भी छत से गिरकर घायल हो गया।
खोह नागोरियान थाना इलाके में पतंग लूटने के दौरान 7 फीट गहरे नाले में गिरने से 11 वर्षीय अर्पित की मौत हो गई। इलाज के दौरान जेएनयू अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। इस तरह जयपुर में मकर संक्रांति का पर्व जहां उत्साह और परंपरा का उत्सव बना, वहीं हादसों ने सतर्कता की जरूरत भी याद दिलाई।


