जयपुर पुलिस के लिए गर्व का क्षण सामने आया है। कमिश्नर ऑफ पुलिस बीजू जॉर्ज जोसफ को स्मार्ट पुलिसिंग और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। किराएदार, ड्राइवर और घरेलू नौकरों के सत्यापन के लिए विकसित की गई जन-उपयोगी ‘नजर’ मोबाइल एप को स्कॉच फाउंडेशन द्वारा टेक्नोलॉजी इनोवेशन कैटेगरी में प्रतिष्ठित स्कॉच अवॉर्ड से नवाजा गया है। यह सम्मान शनिवार को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रदान किया गया।
इस अवसर पर जयपुर पुलिस की ओर से यह अवॉर्ड ‘नजर’ एप के निर्माता और तत्कालीन अतिरिक्त आयुक्त कुंवर राष्ट्रदीप ने प्राप्त किया। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में एडीजी के पद पर कार्यरत बीजू जॉर्ज जोसफ के जयपुर कमिश्नर रहते हुए यह एप तैयार की गई थी। उन्होंने बताया कि दो वर्ष पूर्व अतिरिक्त आयुक्त के रूप में कार्यरत कुंवर राष्ट्रदीप ने इस अभिनव एप की परिकल्पना और विकास किया था, इसी कारण डीजीपी राजीव शर्मा के निर्देश पर उन्हें अवॉर्ड ग्रहण करने के लिए भेजा गया।
नागरिक सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
‘नजर’ एप का मुख्य उद्देश्य नागरिकों की सुरक्षा को मजबूत करना और किराएदारों, ड्राइवरों व घरेलू नौकरों का सत्यापन आसान, पारदर्शी और डिजिटल बनाना है। इस एप के माध्यम से आमजन बिना थाने गए अपने स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इससे पुलिस और नागरिकों के बीच समन्वय बेहतर हुआ है और अपराध नियंत्रण में भी मदद मिली है।
एप की विशेषताएं और उपयोगिता
इस एप के जरिए लोग अपनी संपत्ति पर रहने वाले किराएदारों, काम करने वाले घरेलू सहायकों और ड्राइवरों की जानकारी सीधे पुलिस के साथ साझा कर सकते हैं। इससे संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना आसान हुआ है और नागरिक सुरक्षा को नई मजबूती मिली है। स्कॉच फाउंडेशन ने इसकी जन-उपयोगिता और प्रभावी तकनीकी संरचना को देखते हुए 104वें स्कॉच शिखर सम्मेलन में इसे सम्मानित किया।
विकास, लॉन्च और आंकड़े
जयपुर पुलिस द्वारा ‘नजर’ एप का विकास 28 सितंबर 2023 को किया गया था। शुरुआत में यह केवल बीट कॉन्स्टेबल के लिए उपलब्ध थी, लेकिन जून 2024 से इसे आम जनता के लिए गूगल प्ले स्टोर पर लॉन्च किया गया। अब तक इस एप को 33 हजार से अधिक लोग डाउनलोड कर चुके हैं और इसके माध्यम से 62 हजार 220 से ज्यादा किराएदारों व घरेलू नौकरों का सर्वे पूरा किया जा चुका है।
यह सम्मान न केवल जयपुर पुलिस की तकनीकी सोच को दर्शाता है, बल्कि स्मार्ट पुलिसिंग के क्षेत्र में राजस्थान की पहचान को भी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करता है।


