जयपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य और भारतीय पोलो टीम के कप्तान रह चुके पद्मनाभ सिंह को राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2025 के तहत अर्जुन पुरस्कार के लिए सिफारिश की गई है। 26 साल के पद्मनाभ सिंह ने पोलो के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्ट प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता से देश को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।

पद्मनाभ सिंह उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और नरेंद्र सिंह के बेटे हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मेयो कॉलेज, अजमेर से और आगे की पढ़ाई इंग्लैंड के मिडफील्ड स्कूल से की। बचपन से ही पोलो में रुचि रखने वाले पद्मनाभ ने 2015 में इंग्लैंड में अपने पोलो करियर की शुरुआत की और वहां विंडसर के गाडर्स पोलो क्लब के सदस्य बने। 2017 में उन्होंने हर्लिंगम पार्क की ऐतिहासिक यात्रा में भारतीय नेशनल टीम की कमान संभाली, जो पिछले 70 साल में वहां जाने वाली पहली भारतीय टीम थी।

पद्मनाभ सिंह का पोलो में योगदान केवल खेल तक सीमित नहीं है। उन्हें 2018 में फोर्ब्स 30 अंडर 30 एशिया की सूची में शामिल किया गया और अमेरिकी ग्लोबल ब्रांड यूएस पोलो ने उन्हें अपना ग्लोबल ब्रांड एंबेसडर बनाया। राजस्थान पोलो क्लब के सदस्य और टीम के कप्तान पद्मनाभ सिंह का कहना है कि भारत में पोलो का भविष्य सुनहरा है। युवा खिलाड़ियों को उच्च स्तर का प्रशिक्षण देने के लिए उन्होंने पोलो स्कूल की स्थापना की है और अपने दो बेहतरीन घोड़े स्कूल को दान किए हैं। इसके अलावा, वे राजस्थान के स्वदेशी मारवाड़ी घोड़ों के संरक्षण और उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए सक्रिय हैं।
पद्मनाभ सिंह का शाही परिवार से संबंध भी उल्लेखनीय है। 2011 में सवाई भवानी सिंह के निधन के बाद उन्हें 12 साल की उम्र में अनौपचारिक रूप से जयपुर के महाराजा का ताज पहनाया गया। वे जयपुर के शाही परिवार के 303वें वंशज हैं। उनकी उपलब्धियां और समर्पण अर्जुन पुरस्कार के लिए उन्हें योग्य उम्मीदवार बनाते हैं और पोलो के क्षेत्र में भारत की नई पहचान बनाने में सहायक हैं।


