साल 2026 का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण मंगलवार दोपहर 3:21 बजे शुरू होकर शाम 6:47 बजे तक रहा। लगभग साढ़े तीन घंटे तक चले इस खगोलीय घटनाक्रम को देश के कई हिस्सों में साफ तौर पर देखा गया। ग्रहण से पहले ही सुबह से ‘सूतक काल’ शुरू हो गया, जिसके चलते देशभर के अधिकांश मंदिरों के कपाट मंगल आरती के बाद बंद कर दिए गए।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल को अशुभ समय माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ, भोजन और शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों में शुद्धिकरण की विशेष प्रक्रिया अपनाई गई, जिसमें भगवान को स्नान, नए वस्त्र-श्रृंगार और भोग-आरती के बाद शाम 7 बजे से श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू किए गए।
हालांकि, श्री महाकालेश्वर मंदिर में परंपरा के अनुसार कपाट बंद नहीं किए गए। यहां सुबह भस्म आरती के दौरान होली उत्सव भी मनाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
वहीं भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बताया कि यह पूर्ण चंद्र ग्रहण एशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, रूस, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका समेत कई देशों में दिखाई दिया। भारत में इसका पहला दृश्य अरुणाचल प्रदेश के तेजू में शाम 5:03 बजे चंद्रोदय के साथ देखने को मिला।
कई शहरों में लोगों ने घरों की छतों और खुले मैदानों से दूरबीन और कैमरों के जरिए इस दुर्लभ खगोलीय नजारे को कैद किया। सोशल मीडिया पर भी चंद्र ग्रहण की तस्वीरें और वीडियो वायरल रहे।
ज्योतिष और धार्मिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण को महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि ग्रहण के बाद मंदिरों और घरों में गंगाजल छिड़ककर शुद्धिकरण किया जाता है। इस दौरान मंत्रोच्चार, दान-पुण्य और पूजा का विशेष महत्व रहता है।


