वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में भारत की GDP ग्रोथ 8.2% हो गई है। ये पिछली 6 तिमाही में सबसे ज्यादा है। पिछले साल की जुलाई-सितंबर तिमाही में ये 5.6% थी।
वहीं, इस साल पिछली तिमाही यानी अप्रैल-जून में GDP ग्रोथ 7.8% रही थी। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के बेहतर परफॉर्मेंस की वजह से GDP में ये उछाल आया है। ये आंकड़े सरकार ने 28 नवंबर को जारी किए हैं।
वैश्विक चुनौतियों और वैश्विक व्यापार नीति की अनिश्चितता के बावजूद भारत अभी भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
RBI ने 6.5% इकोनॉमी ग्रोथ का अनुमान जताया था
1 अक्टूबर को रिजर्व बैंक (RBI) ने मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग में FY26 के लिए इकोनॉमी ग्रोथ का अनुमान 6.5% से बढ़ाकर 6.8% कर दिया। ये अनुकूल माहौल, सरकार और रिजर्व बैंक की सहायक नीतियों के साथ, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए निकट भविष्य में अच्छा संकेत देता है। भले ही ग्लोबल ट्रेड की चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं कुछ हद तक कम हुई हैं।
इकोनॉमी की हेल्थ को ट्रैक करने के लिए GDP का इस्तेमाल होता है। ये देश के भीतर एक तय समय में सभी गुड्स और सर्विस की वैल्यू को दिखाती है। इसमें देश की सीमा के अंदर रहकर जो विदेशी कंपनियां प्रोडक्शन करती हैं, उन्हें भी शामिल किया जाता है।


