सांगानेर क्षेत्र में टेक्सटाइल इकाइयों द्वारा फैलाए जा रहे जल प्रदूषण और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) की कार्यप्रणाली को लेकर बुधवार को मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई ।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जो इकाइयां ड्रेनेज सिस्टम से नहीं जुड़ी हैं या प्रदूषित पानी बहा रही हैं, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। उन्होंने द्रव्यवती नदी में प्रदूषित जल छोड़ने वाली इकाइयों की पहचान के लिए JDA और RSPCB एवं संबंधित विभागों द्वारा संयुक्त सर्वे शुरू करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने नदियों में अपशिष्ट बहाने वाली डिफॉल्टर इकाइयों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए कहा कि CETP की मरम्मत, सभी इकाइयों द्वारा सहमति (Consent) के आवेदन और सदस्यता प्रमाणपत्र जारी किए जाएं।
CETP के संचालन और कनेक्टिविटी पर कड़े निर्देश—
बैठक में बताया गया कि वर्तमान में 12.3 MLD क्षमता वाला CETP अपनी क्षमता से काफी कम (3.1 MLD) पर चल रहा है और इसके कई महत्वपूर्ण हिस्से जैसे मैकेनिकल बार स्क्रीन, स्लज थिकनर और MVR सिस्टम वर्तमान में अकार्यक्षम हैं । अब तक 892 में से 758 इकाइयों को CETP से जोड़ा जा चुका है । शेष इकाइयों को जोड़ने के लिए पम्पिंग स्टेशन-III और पाइपलाइन का कार्य 31 मई तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने SEPD को निर्देशित किया कि 30 अप्रैल तक CETP की समस्त खामियां दूर करके संचालन सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में PDCOR द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में सुझाए गए उपायों पर चर्चा की गयी।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग आनंद कुमार, अध्यक्ष प्रदूषण नियंत्रण मंडल देबाशीष पृष्टि , प्रमुख शासन सचिव, कृषि एवं उद्यानिकी एवं पंचायती राज (कृषि) विभाग मंजू राजपाल, आयुक्त, जयपुर विकास प्राधिकरण सिद्धार्थ महाजन एवं विभिन्न विभागों के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।


