राजस्थान की राजस्थान सरकार ने पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 31 साल पुराना वह नियम समाप्त कर दिया गया, जिसके तहत दो से अधिक संतान वालेभजनलाल शर्मा व्यक्ति को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाता था। अब ऐसे उम्मीदवार भी पंचायत और निकाय चुनावों में भाग ले सकेंगे।
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि यह प्रावधान 1995 में तब लागू किया गया था, जब जनसंख्या विस्फोट पर नियंत्रण की आवश्यकता थी। उस समय प्रजनन दर 3.6 थी, जो अब घटकर करीब 2 प्रतिशत रह गई है। सरकार का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में यह प्रतिबंध आवश्यक नहीं रह गया है, इसलिए इसे हटाने का निर्णय लिया गया। इसके लिए राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक 2026 और राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) विधेयक 2026 लाए जाएंगे।
कैबिनेट ने कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले भी किए हैं। आर्थिक अपराधों पर रोकथाम के लिए ‘राज्य राजस्व आसूचना निदेशालय’ की जगह ‘राजस्व आसूचना एवं आर्थिक अपराध निदेशालय’ का गठन किया जाएगा। इससे रियल एस्टेट धोखाधड़ी, बैंक-बीमा और शेयर बाजार से जुड़े वित्तीय अपराध, फर्जी प्लेसमेंट एजेंसियों और मल्टी लेवल मार्केटिंग ठगी जैसे मामलों पर तेजी से कार्रवाई हो सकेगी।
इसी के साथ अजमेर में राजस्थान आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय के प्रारूप को मंजूरी दी गई है, जिससे आयुर्वेद, योग, यूनानी और होम्योपैथी शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
विकास कार्यों के तहत जयपुर की टोंक रोड पर 5815 करोड़ रुपए की लागत से ‘राजस्थान मंडपम’ और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर विकसित किया जाएगा। यह परियोजना पूर्णतः स्व-वित्तपोषित मॉडल पर होगी, जिससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
ग्रामीण प्रशासन को मजबूत करने के लिए वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी का नया पद सृजित किया गया है और 750 पदों को क्रमोन्नत किया जाएगा। वहीं उद्योग मंत्री राज्यवर्धन राठौड़ ने औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए नई राजस्थान औद्योगिक पार्क प्रोत्साहन नीति लाने की घोषणा की है, जिसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी से औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, दो संतान नियम हटने से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में संभावित उम्मीदवारों को मौका मिलेगा और स्थानीय चुनावों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। यह फैसला आगामी पंचायत और नगर निकाय चुनावों में अहम प्रभाव डाल सकता है।


