जोधपुर में कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के एक सप्ताह बाद भी उनकी मृत्यु के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है। मामला अब स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच के दायरे में है। मंगलवार को जहां जोधपुर में एसआईटी टीम ने अस्पताल और आश्रम से जुड़े लोगों से पूछताछ की, वहीं उनके पैतृक गांव बाड़मेर जिले के परेऊ में समाधि पूजन का आयोजन श्रद्धा और भावनाओं के बीच सम्पन्न हुआ।
28 जनवरी को हुई साध्वी प्रेम बाईसा की अचानक मौत ने क्षेत्र में हलचल मचा दी थी। मौत के कारण स्पष्ट न होने से परिजन, अनुयायी और स्थानीय लोग लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। इसी कड़ी में एसआईटी की टीम ने प्रेक्षा हॉस्पिटल का दौरा कर वहां के डॉक्टरों और स्टाफ से विस्तृत जानकारी जुटाई। बताया गया कि साध्वी को बेहोशी की हालत में अस्पताल लाया गया था, जहां शरीर में कोई हलचल नहीं थी। डॉक्टरों के अनुसार उन्हें पहले सामान्य जुकाम, खांसी और गले की समस्याएं रहती थीं, लेकिन गंभीर बीमारी की पुष्टि नहीं हुई थी।
मामले में इंजेक्शन लगाने वाले नर्सिंग ऑफिसर देवी सिंह राजपुरोहित ने भी अपनी सफाई दी है। उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन दोपहर में आश्रम से कॉल आया था, लेकिन वे शाम करीब 5 बजे पहुंचे। उन्होंने डॉक्टर की पर्ची के आधार पर दो इंजेक्शन लगाए थे और अपनी मर्जी से कोई दवा नहीं दी। इंजेक्शन के समय साध्वी की हालत सामान्य थी, लेकिन करीब 25 मिनट बाद तबीयत बिगड़ने की सूचना मिली, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
एसआईटी की एसीपी छवि शर्मा के नेतृत्व में टीम ने अब तक आश्रम और अस्पताल से जुड़े 10 से अधिक लोगों से पूछताछ की है। मेडिकल बोर्ड द्वारा लिए गए सैंपल्स को विभिन्न एजेंसियों में परीक्षण के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने तक सभी तकनीकी और मेडिकल पहलुओं की गहन जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि मौत के असली कारण सामने आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
इधर, बाड़मेर के परेऊ गांव में साध्वी प्रेम बाईसा की स्मृति में समाधि पूजन संपन्न हुआ। बड़ी संख्या में संत, महात्मा और अनुयायी शामिल हुए। भावुक माहौल के बीच उनके पिता वीरम नाथ, जिन्होंने बेटी के वियोग में अन्न-जल त्याग दिया था, संतों के समझाने पर दूध ग्रहण कर अपना संकल्प तोड़ा। संतों ने साध्वी को ‘सनातन की बेटी’ बताते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई।


