प्रसिद्ध न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भावना शर्मा को न्यूरोलॉजी के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए इंडियन कॉलेज ऑफ फिजिशियन (Fellow of Indian College of Physicians) सम्मान से नवाजा गया। यह सम्मान उन्हें चिकित्सा और शोध क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए प्रदान किया गया। डॉ. शर्मा इस अवसर पर एपिकॉन-2026 में भाग लेने के लिए पटना भी पहुंचीं और चिकित्सा जगत के अन्य विशेषज्ञों के साथ अपने अनुभव साझा किए।
डॉ. भावना शर्मा ने ब्रेन टीबी (Tuberculosis of Brain) पर गंभीर चेतावनी देते हुए कहा कि यह एक गंभीर बीमारी है, लेकिन समय पर पहचान और उपचार मिलने पर ठीक होने योग्य है। उन्होंने बताया कि ब्रेन टीबी सामान्य टीबी से कहीं अधिक खतरनाक होती है, क्योंकि इसमें टीबी बैक्टीरिया मस्तिष्क की झिल्ली या ब्रेन के भीतर गांठ बना देता है।
उन्होंने कहा कि देर से इलाज मिलने पर मरीज की जान को खतरा हो सकता है। कुल टीबी मामलों में लगभग 5 से 10 प्रतिशत में ब्रेन टीबी देखी जाती है। बच्चों और युवाओं में इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह रोग केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है, जिससे मरीज की सोच, व्यवहार और संतुलन पर असर पड़ता है।
डॉ. शर्मा ने विशेष रूप से कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों, कुपोषित बच्चों, बुजुर्गों, मधुमेह के मरीजों, एचआईवी संक्रमितों, लंबे समय से टीबी के मरीजों और शराब-सिगरेट का सेवन करने वालों को अधिक सतर्क रहने की सलाह दी। उनका मानना है कि समय पर जांच और इलाज से ब्रेन टीबी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


