राजस्थान के बीकानेर में राज्य वृक्ष खेजड़ी के संरक्षण को लेकर चल रहा ‘खेजड़ी बचाओ’ आंदोलन अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। मंगलवार को गुरु जंभेश्वर भगवान की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद 363 लोगों ने सामूहिक अनशन शुरू कर दिया। अनशनकारियों में 29 साधु-संत, 29 महिलाएं और 305 पुरुष शामिल हैं। बड़ी संख्या में संत-महात्माओं और महिलाओं की भागीदारी ने आंदोलन को और मजबूती प्रदान की है।
आंदोलन को उस समय बड़ा समर्थन मिला, जब राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे ने खुलकर इसके पक्ष में आवाज उठाई। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “सिर सांठे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण।” राजे ने खेजड़ी को देववृक्ष बताते हुए कहा कि यह केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि आस्था और संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जिसकी हम पूजा करते हैं, उसके संरक्षण का दायित्व भी हमारा ही है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने राजनीति से ऊपर उठकर खेजड़ी और ओरण (गौचर भूमि) को बचाने की अपील की और कहा कि वे इस मुहिम में जनता के साथ खड़ी हैं। उनके समर्थन के बाद आंदोलन की चर्चा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर तेज हो गई है। गौरतलब है कि वर्तमान में राज्य में भाजपा की ही सरकार है, ऐसे में राजे के इस रुख को खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सोलर प्रोजेक्ट्स के नाम पर खेजड़ी के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है, जिससे पर्यावरण और पारंपरिक जीवनशैली पर गंभीर असर पड़ रहा है। खेजड़ी को मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और पशुधन के चारे का प्रमुख स्रोत है।
प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। कलेक्ट्रेट परिसर में एसटीएफ सहित भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और आंदोलनकारियों से लगातार संवाद किया जा रहा है। हालांकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और खेजड़ी संरक्षण को लेकर ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।


