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ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की महत्वपूर्ण पहल

Last updated: 19.02.2026 5:11 pm
Anjali Dadhich
Published: 19.02.2026

 मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग को बढ़ावा देने के लिए व्यवसायों और आमजन को गैर जरूरी अनुपालन एवं विनियमों से राहत देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल की है। राज्य सरकार भू उपयोग, भवन और निर्माण, श्रम, व्यवसायों के लिए लाइसेंस प्रक्रिया और जन उपयोगिता सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चरणबद्धरूप से नियमों और प्रक्रियाओं का सरलीकरण करने जा रही है। मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास के निर्देशन में इससे संबंधित कार्य योजना को अंतिम रूप दे दिया गया है।

        इस कार्य योजना के अनुसार चुनिंदा श्रेणियों में उचित भूमि उपयोग के लिए भू-रूपांतरण आवश्यकताओं को समाप्त कर प्रक्रियात्मक देरी कम करने के लिए आंध्र प्रदेश में लागू की गई प्रणाली का अध्ययन किया जाएगा। जब तक निषिद्ध न हो तब तक सभी गतिविधियों की अनुमति के सिद्धांत पर मिश्रित भूमि-उपयोग विकास को स्वतः अनुमत करने के लिए बिल्डिंग बायलॉज और मास्टर प्लान में आवश्यक संशोधन पर विचार किया जा रहा है। वहीं, सहूलियत के लिए जोन-वार निषिद्ध सूचियां भी स्पष्ट रूप से परिभाषित की जाएंगी।

                कार्य योजना के अंतर्गत औद्योगिक क्लस्टर्स में खाली पड़ी भूमि का समुचित उपयोग सुनिश्चित करने हेतु औद्योगिक क्षेत्र भूमि आवंटन नीति को उदार बनाने, औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिकों को सस्ते आवास उपलब्ध कराने तथा अपशिष्ट उपचार और फायर सेफ्टी सिस्टम जैसे आधारभूत ढांचे के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। ऊंचाई संबंधी प्रतिबंधों और सेटबैक संबंधी प्रावधानों को तर्कसंगत बनाते हुए फायर सेफ्टी से जुड़ी ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस को अपनाने के लिए बिल्डिंग बायलॉज और फायर सेफ्टी नियमों में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।

                निवेशकों को भवन और निर्माण से जुड़ी सभी अनापत्तियां जारी करने, औद्योगिक क्लस्टर्स से संबंधित सभी अप्रूवल देने और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सभी लाइसेंस जारी करने के लिए सिंगल प्वाइंट कॉन्टैक्ट के रूप में नोडल एजेंसियां नियुक्त करने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए वर्किंग ग्रुप बना कर विभिन्न राज्यों में अपनाए गए मॉडल्स का अध्ययन किया जाएगा। इसी प्रकार, व्यवसायों के लिए जरूरी लाइसेंस का सूचीकरण किया जाएगा, ताकि एक ही अनुपालना के लिए दोहरे लाइसेंस की जरूरत समाप्त की जा सके। इसके लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग की अध्यक्षता में ऊर्जा, नगरीय विकास, एलएसजी, श्रम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित विभिन्न विभागों के सचिवों का एक वर्किंग ग्रुप बनाया जाएगा।

                दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए सूचना के आधार पर डीम्ड लाइसेंसिंग के माध्यम से आजीवन पंजीकरण की अनुमति देने और ऐसे सभी प्रतिष्ठानों के लिए 24×7 संचालन की अनुमति देने पर भी सरकार विचार कर रही है। वजन एवं माप उपकरणों के लिए लाइसेंस सरलीकरण की भी तैयारी है ताकि मैन्युफैक्चरर और डीलर को बिना सरकारी निरीक्षण के स्वघोषणा के आधार पर स्वतः अनुमोदन मिल सके। वहीं, कम जोखिम वाली श्रेणियों में फील्ड निरीक्षण की अनिवार्यता को हटाकर स्वघोषणा के आधार पर विभिन्न विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा बिजली कनेक्शन जारी करने का प्रावधान भी कार्ययोजना में शामिल है।

                औद्योगिक निवेश को गति देने के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने,  परियोजनाओं के शुरू होने में लगने वाले वास्तविक समय को कम करने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत बनाया जाएगा। साथ ही, एमएसएमई के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र में स्थापित सभी टेस्टिंग सुविधाओं की एकीकृत राज्य-स्तरीय डायरेक्टरी बनाई जाएगी। विधि विभाग के स्तर पर सेक्टरवार सभी राज्य कानूनों, नियमों, विनियमों और सरकारी आदेशों की एक केंद्रीकृत डिजिटल रिपॉजिटरी बनाई जाएगी।

                इन सभी अनुपालन और विनियम बदलावों के कार्यान्वयन को आसानी से एक ही बार में लागू करने के लिए कार्ययोजना अनुसार मिले सुझावों को शामिल करते हुए भारत सरकार से प्राप्त ड्राफ्ट के आधार पर एक विधेयक तैयार कर अनुमोदन के लिए रखा जाएगा। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा गत वर्ष भी दंड के स्थान पर न्याय एवं विश्वास आधारित विनियमन को बढ़ावा देने के लिए राजस्थान जन विश्वास (उपबन्धों का संशोधन) लाया गया है। इसी कड़ी में, सुशासन व जन सहभागिता में वृद्धि किये जाने के लिए अगली पीढ़ी के सुधार के रूप में राजस्थान जन विश्वास अधिनियम 2.0 लाए जाने की घोषणा राज्य बजट 2026-27 में की गई है।

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