मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अगुवाई में राज्य सरकार श्रमिक कल्याण को अपनी प्रमुख प्राथमिकता के रूप में आगे बढ़ा रही है। सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से श्रमिकों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है एवं उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। इन योजनाओं का लाभ मिलने से श्रमिकों की क्षमता में भी वृद्धि हुई है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। मुख्यमंत्री का मानना है कि समृद्ध एवं उत्कृष्ट राजस्थान की परिकल्पना समावेशी विकास से ही संभव है। इसी क्रम में राज्य सरकार द्वारा पिछले सवा दो सालों में कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से श्रमिकों के जीवन में ठोस बदलाव लाए गए हैं।
20 लाख से अधिक श्रमिक जुड़े विभागीय योजनाओं से
श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल (बीओसीडब्ल्यू) द्वारा विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। प्रदेश में 20 लाख से अधिक श्रमिक इन विभागीय योजनाओं से जुड़े हैं। सिलिकोसिस से पीड़ित श्रमिकों को विशेष योग्यजन निदेशालय द्वारा आर्थिक संबल दिया जा रहा है। इस बीमारी से पीड़ित होने पर 3 लाख रुपये तथा मृत्यु होने की स्थिति में 2 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाती है।
संस्थागत प्रसव में सुधार, मातृ-शिशु स्वास्थ्य बेहतर
निर्माण श्रमिक शिक्षा एवं कौशल विकास योजना के तहत श्रमिकों के बच्चों को छात्रवृत्ति दी जा रही है। गत 2 वर्षों में 9 लाख से अधिक बच्चों को स्कूली शिक्षा, आईटीआई, स्नातक, स्नातकोत्तर के लिए छात्रवृत्ति दी जा चुकी है। इसी तरह प्रसूति सहायता योजना के माध्यम से महिला श्रमिक अथवा श्रमिक की पत्नी को बच्चे के जन्म पर आर्थिक सहायता देय है। इससे संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिला है तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार आया है। साथ ही, श्रमिक परिवारों को आर्थिक राहत भी प्राप्त हुई है।
श्रमिकों की क्षमता वृद्धि पर सरकार का फोकस
राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं। श्रमिकों की सामान्य अथवा दुर्घटना में मृत्यु की स्थिति में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। योजना के तहत मृत्यु होने पर 5 लाख रुपये, दुर्घटना में स्थायी दिव्यांगता पर 3 लाख रुपये एवं आंशिक स्थायी दिव्यागंता पर 1 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाती है। इसके अलावा निर्माण श्रमिक की सामान्य मृत्यु पर भी 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देय है। श्रमिकों की कार्य क्षमता को बढ़ाने के लिए निर्माण श्रमिक औजार/टूल किट सहायता योजना के अंतर्गत पिछले 2 वर्षों में 18 हजार श्रमिकों को वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।
श्रमिकों के बच्चों को उच्च शिक्षा में सहयोग
राज्य सरकार की मंशा है कि श्रमिकों के बच्चों को उच्च शिक्षा के साथ-साथ प्रशासनिक सेवाओं में जाने के भी भरपूर अवसर मिले। इसके लिए निर्माण श्रमिक एवं उनके आश्रित बच्चों द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा अथवा राजस्थान प्रशासनिक सेवा के लिए आयोजित प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने पर प्रोत्साहन राशि दी जाती है। साथ ही, इनका आईआईटी अथवा आईआईएम में प्रवेश मिलने पर ट्यूशन फीस का भी पुनर्भरण किया जाता है। सरकार द्वारा निर्माण श्रमिकों के व्यवसायिक ऋण पर ब्याज सहायता व विदेश में रोजगार के लिए वीजा व्यय का पुनर्भरण के साथ ही अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता के लिए भी प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
श्रमिकों के कल्याण के लिए संचालित सभी योजनाओं के आवेदन एवं निस्तारण की प्रक्रिया को ऑनलाइन एवं पारदर्शी बनाया गया है। एलडीएमएस पोर्टल के माध्यम से समयबद्ध सेवाएं सुनिश्चित की जा रही हैं, जिससे श्रमिकों को सीधे उनके खाते में राशि हस्तांतरित प्राप्त हो रही है।


