मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार के बेहतर प्रबंधन एवं दूरगामी निर्णयों के फलस्वरूप प्रदेश में विद्युत प्रसारण एवं वितरण तंत्र में महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं, जिसके फलस्वरूप भीषण गर्मी के दौर में भी घरेलु, कृषि उपभोक्ताओं सहित उद्योगों को निर्बाध एवं पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। वहीं, जयपुर, जोधपुर एवं अजमेर विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा सतत मॉनिटरिंग एवं नवाचारों से विद्युत उपभोक्ताओं की शिकायतों में उल्लेखनीय कमी भी आई है।
राज्य सरकार वर्ष 2027 तक दिन के समय में किसानों को बिजली उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। इसके लिए विद्युत प्रसारण तंत्र का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। राज्य सरकार के अब तक के कार्यकाल में प्रदेशभर में 33 केवी के 444 सब स्टेशन स्थापित किए गए हैं। वहीं, 211 सब स्टेशन कार्य प्रगतिरत हैं। इसी प्रकार, 400, 220 और 132 केवी के 59 जीएसएस स्थापित किए गए हैं और 145 जीएसएस का कार्य प्रगतिरत हैं। वहीं, सौर ऊर्जा संयंत्र (कुसुम-ए, सी और रूफटॉप सहित) के वृहद नेटवर्क के जरिए लगभग 7 हजार 376 मेगावाट तथा कोयला आधारित तापीय परियोजनाओं से 7 हजार 830 मेगावाट विद्युत क्षमता उपलब्ध है।
तापमान में अत्यधिक बढ़ोतरी के कारण ट्रिपिंग अथवा फॉल्ट की आशंका से निपटने तथा उपभोक्ताओं को व्यवधान रहित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए डिस्कॉम्स कंपनियों में कार्ययोजना के तहत अलर्ट मोड पर कार्य किया है। गर्मी आने से पहले डिस्कॉम्स ने ट्रांसफार्मरों में 13 हजार 473 एमवीए की क्षमता आवर्धन, 11 केवी और 33 केवी के 4 हजार 815 फीडरों का विभाजन, लगभग 5 हजार सर्किट लाइनों का अतिरिक्त नेटवर्क विस्तार करने के साथ ही 3 हजार 682 जीएसएस के रखरखाव का कार्य व्यापक स्तर पर किया।
वहीं, उपभोक्ताओं की समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए विद्युत वितरण निगमों ने प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र विकसित किया गया है। इस तंत्र में टोल फ्री कॉल सेंटर्स, ग्राहक सेवा केन्द्र, केन्द्रीय नियंत्रण कक्ष के साथ-साथ लगभग 1129 फॉल्ट रेक्टिफिकेशन टीम उपभोक्ताओं की शिकायतों पर रेपिड एक्शन लेते हुए उपभोक्ताओं को राहत पहुंचा रही है। परिणामस्वरूप शिकायतों एवं उनके निस्तारण के संबंध में उल्लेखनीय कमी आई है। जयपुर, अजमेर और जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में 1 अप्रेल 2025 से 20 मई 2025 तक नो करंट की लगभग 3 लाख 52 हजार शिकायतें दर्ज हुई, जो इस कालखण्ड में वर्ष 2026 के दौरान लगभग 41 हजार की कमी के साथ 3 लाख 11 हजार ही रह गई हैं। यह दर्शाता है कि विद्युत आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
राज्य में सरप्लस बिजली उपलब्ध-
प्रदेश में 1 मई को विद्युत की मांग 2860 लाख यूनिट थी जो हीटवेव के कारण अब बढ़कर 3850 लाख यूनिट तक पहुंच गई है। इस ग्रीष्म ऋतु की सर्वाधिक विद्युत मांग 27 मई को रात्रि करीब 10.15 बजे 17333 मेगावाट दर्ज हुई जिसे बिना किसी कटौती के पूरा किया गया है।
राज्य में दिन के समय डिमांड की तुलना में बिजली की सरप्लस उपलब्धता है। प्रदेश में 21 मई को 15563 मेगावाट की मांग के विरूद्ध 18751 मेगावाट की उपलब्धता रही। वहीं 22 मई को 15633 मेगावाट की मांग की तुलना में 17497 मेगावाट तथा 23 मई को 16611 मेगावाट मांग की तुलना में 20263 मेगावाट की विद्युत उपलब्धता रही। इसी प्रकार 24 मई को 15500 मेगावाट के सापेक्ष 19189 मेगावाट, 25 मई को 15948 मेगावाट की तुलना में 21285 मेगावाट, 26 मई को 16516 मेगावाट की तुलना में 20898 मेगावाट तथा 27 मई को 16683 मेगावाट की मांग के सापेक्ष 21542 मेगावाट की विद्युत उपलब्धता रही।
सोलर उत्पादन नहीं होने से रात्रि के समय उपलब्धता लगभग 16500 मेगावाट तक रह जाती है और मांग एवं आपूर्ति के बीच कमी होने की स्थिति में इसे एनर्जी एक्सचेंज के माध्यम से क्रय कर पूरा किया जाता है।
स्वच्छ और सुरक्षित ऊर्जा पर विशेष जोर-
मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार उत्पादन इकाइयों एवं प्रसारण तंत्रों का समयानुसार रख-रखाव सुनिश्चित किया जा रहा है। वहीं, सौर, पवन ऊर्जा परियोजनाओं के साथ-साथ पम्प स्टोरेज, गैस और जल विद्युत तथा बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि प्रदेश स्वच्छ और सुरक्षित ऊर्जा की दिशा में नए कीर्तिमान स्थापित कर सके।
जेवीवीएनएल का नवाचार, अभियंताओं रात्रि में कर रहे ‘विद्युत सुरक्षा’-
भीषण गर्मी में उपभोक्ताओं को निर्बाध एवं पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए डिस्कॉम्स प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही हैं। इसी कड़ी में जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने उल्लेखनीय पहल की है। इसके अंतर्गत निगम के कनिष्ठ अभियंता, सहायक अभियंता तथा अधिशासी अभियंता रात 8 बजे से रात्रि 11 बजे तक पीक ऑवर्स के दौरान फील्ड में जाते हैं। इस दौरान वे हैवी लोड वाले जीएसएस, फीडर, ट्रांसफॉर्मरों या पिलर बॉक्स को चेक कर लोड बैलेंसिंग करते हैं। इससे ट्रिपिंग तथा नो करंट संबंधी उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित निराकरण में मदद मिल रही है। वहीं, वोल्टेज में उतार-चढ़ाव की समस्या को भी दूर किया जा रहा है।


