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मुख्यमंत्री ने राजस्थान लैंग्वेज मॉडल ट्रेनिंग हैकाथाॅन, स्मार्ट राजस्थान, राजस्थान इनोवेशन चैलेंज और ई-मित्र व्हाट्सएप सेवा का किया शुभारंभ

Last updated: 02.07.2026 1:02 pm
Anjali Dadhich
Published: 02.07.2026

 मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि तकनीक केवल सुविधा का साधन न होकर सामाजिक समावेशन एवं जनकल्याण का प्रमुख माध्यम बने। डिजिटल शासन का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और कोई भी नागरिक विकास की मुख्यधारा से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डीबीटी के माध्यम से हर योजना का लाभ सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंचाया है। जन-धन, आधार और मोबाइल के जरिये बिचैलियों का दखल खत्म किया और डिजिटल इंडिया जैसी पहल कर तकनीक को आर्थिक विकास का साधन बनाया। 

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी) में दो दिवसीय 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की मंशा है कि ई-गवर्नेंस को आसान, प्रभावी और किफायती बनाया जाए। इसी क्रम मेंयूपीआई आज लेनदेन का आसान जरिया बन चुका है। शासन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी, उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित बनाने में एआई, डेटा विश्लेषण, डिजिटल ढांचा और साइबर सुरक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि राजस्थान में तकनीक को जनकल्याण का प्रभावी माध्यम बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। राजस्थान संपर्क जन-अभियोग निवारण का प्रभावी मंच बन चुका है। इस प्लेटफॉर्म से हर महीने ढाई से तीन लाख शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण हो रहा है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं राजस्थान संपर्क पर शिकायतों का निवारण करते हैं। 

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार ने राजस्थान एआई-एमएल पॉलिसी 2026 लागू की है। इसके जरिए एआई के उपयोग से प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और उद्योग सहित विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक कार्यों का आधार तैयार हुआ है। वहीं, एवीजीसी एंड एक्सआर पॉलिसी लागू कर एनिमेशन, गेमिंग, विजुअल इफेक्ट्स और डिजिटल तकनीकों में युवाओं के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने एआई एवं क्वांटम कम्प्यूटिंग मिशन की भी शुरूआत की है।

उन्होंने कहा कि राजस्थान देश के अग्रणी स्टार्टअप राज्यों में तेजी से उभर रहा है। पिछले दो वर्षों में यहां स्टार्टअप्स की संख्या 4 हजार से बढ़कर साढ़े आठ हजार से अधिक हो गई है। वहीं, निवेश 250 करोड़ रुपये से बढ़कर एक हजार करोड़ रुपये और रोजगार सृजन का आंकड़ा 22 हजार से बढ़कर 47 हजार से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने नवाचार को प्रोत्साहन देने के लिए प्रदेश में 9 इन्क्यूबेशन सेंटर और 65 लॉन्चपैड स्थापित किए हैं। आई-स्टार्ट कार्यक्रम के माध्यम से हजारों युवाओं को उद्यमिता से जोड़ा गया है तथा स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण एवं स्कूली स्तर पर भी डिजिटल ढांचा सशक्त किया गया है। इसी क्रम में 65 आई-स्टार्ट लॉन्चपैड नेस्ट स्थापित कर 1 लाख 28 हजार से अधिक विद्यार्थियों को नवाचार और उद्यमिता से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल बुनियादी ढांचे को सशक्त करने के उद्देश्य से 1 हजार 686 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का विस्तार किया है जिससे हजारों सरकारी भवन जुड़े हैं। वहीं, 3 हजार 200 से अधिक ग्राम पंचायतों में 12 हजार 500 से अधिक हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शन स्थापित किए गए हैं। राजस्थान में 79 हजार से अधिक ई-मित्र कियोस्कों के माध्यम से 900 से अधिक सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। 

उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए एआई आधारित फोटो सत्यापन और ई-केवाईसी जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। साइबर हमलों और ऑनलाइन धोखाधड़ी से निपटने के लिए आधुनिक साइबर लैब और साइबर रेंज प्लेटफॉर्म तैयार किए गए हैं ताकि हमारा डिजिटल ढांचा पूरी तरह सुरक्षित रहे। नागरिकों की सुरक्षा के दृष्टिगत सार्वजनिक स्थानों तथा शैक्षणिक संस्थानों में 25 हजार से अधिक निगरानी कैमरे शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल पहचान एवं आधार सत्यापन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए राजस्थान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया गया है। 

मुख्यमंत्री ने विभिन्न ई-गवर्नेंस पहलों के तहत राजस्थान लैंग्वेज मॉडल ट्रेनिंग हैकाथाॅन, स्वचालित नागरिक सेवा प्रदायगी मंच स्मार्ट राजस्थान परियोजना, राजस्थान इनोवेशन चैलेंज, ई-मित्र व्हाट्सएप सेवा का शुभारंभ किया। साथ ही, डिजिटल राजस्थान काॅफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। इससे पहले उन्होंने आरआईसी में तकनीकी सेवाओं पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन कर स्टाॅल्स पर ई-गवर्नेंस नवाचारों की जानकारी ली। 

सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि गवर्नेंस, ई-गवर्नेंस और एआई इन गवर्नेंस से हम सभी को तेज सेवा, ज्यादा सेवा और सबसे बेहतर सेवा जैसी तीन प्रमुख सर्विसेज मिलती हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2014 से जेम ट्रिनिटी को शुरू किया गया। आज विश्व में सबसे ज्यादा कैशलेस ट्रांजेक्शन यूपीआई के माध्यम से हमारे देश में हो रहा है। उन्होंने कहा कि हमें ऐसी व्यवस्था बनानी है, जिसमें सरकार आमजन तक उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए तेजी से पहुंचे। डेटा और एआई की मदद से ये लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। राज्य सरकार पारदर्शिता से आमजन को सशक्त बनाने और त्वरित सेवाओं के लिए प्रदेश में तकनीक को अपनाकर निरंतर बढ़ावा दे रही है। 

इस अवसर पर संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, सचिव इलेक्ट्राॅनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी एस. कृष्णन, सचिव प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत निवेदिता शुक्ला वर्मा, शासन सचिव सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग रवि कुमार सुरपुर, विभिन्न राज्यों एवं विभागों के उच्चाधिकारी सहित तकनीकी क्षेत्र से जुड़े उद्यमी, विशेषज्ञ, स्टार्टअप्स प्रोफेशनल्स एवं बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे।

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