कार्तिक शर्मा अपने पूरे परिवार के साथ घर पर टीवी पर देख रहे थे। जैसे ही CSK की आखिरी बोली लगी और उनका नाम पुकारा गया, घर में खुशी की लहर दौड़ गई। हालांकि कार्तिक खुद अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए। उन्होंने कहा, “मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था। मैं उठकर अलग चला गया और रोने लगा। मुझे और मेरे परिवार को इतनी बड़ी रकम की बिल्कुल उम्मीद नहीं थी। अभी भी समझ नहीं आ रहा कि इस पैसे का क्या करूं।”
कार्तिक का क्रिकेट से रिश्ता बेहद कम उम्र में जुड़ गया था। उन्होंने बताया कि उनके पिता मनोज कुमार ने उन्हें महज 4–5 साल की उम्र में क्रिकेट से जोड़ दिया था। पिता खुद लोकल लेवल पर क्रिकेट खेल चुके थे, लेकिन चोट के कारण आगे नहीं बढ़ पाए। यही वजह थी कि उनकी इच्छा थी कि उनके तीन बेटों में से कोई एक उनके अधूरे सपने को पूरा करे। कार्तिक ने बताया कि उनका छोटा भाई अनमोल भी क्रिकेट खेलता है, जबकि सबसे छोटा भाई प्रिंस है।

कार्तिक ने अपनी शुरुआती ट्रेनिंग अपने पिता से ही ली। इसके बाद उन्होंने चाहर क्रिकेट अकादमी में अभ्यास शुरू किया, जहां से उन्हें अंडर-14, अंडर-17 और अंडर-19 स्तर पर खेलने का अवसर मिला। आगे चलकर वे जयपुर स्थित अरावली क्रिकेट अकादमी पहुंचे, जहां रहकर उन्होंने लगातार मेहनत की और अपने खेल को निखारा।
अपने करियर के संघर्षपूर्ण दौर को याद करते हुए कार्तिक ने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें 3–4 साल तक टीम में खेलने का मौका नहीं मिला। यह दौर उनके लिए बेहद कठिन था। ऐसे समय में पिता की सीख और हौसले ने उन्हें संभाले रखा। कार्तिक ने कहा, “पापा ने समझाया कि मेहनत करते रहो, मौका जरूर मिलेगा। उनकी बातों ने मुझे फिर से खड़ा किया।”
आज वही मेहनत रंग लाई है और भरतपुर का यह युवा खिलाड़ी IPL के बड़े मंच पर CSK की जर्सी में नजर आएगा। कार्तिक शर्मा की यह सफलता न सिर्फ उनके परिवार बल्कि राजस्थान के युवा क्रिकेटरों के लिए भी प्रेरणा बन गई है


