कला, साहित्य एवं संस्कृति विभाग, राजस्थान के अधीन राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर द्वारा ‘राजपूताना की रियासतों के ऐतिहासिक एवं प्रशासनिक महत्व के बहुमूल्य अभिलेख’ विषय पर विशेष प्रदर्शनी का शुभारम्भ उपमुख्यमंत्री तथा कला- साहित्य एवं संस्कृति तथा पुरातत्व मंत्री दिया कुमारी द्वारा मंगलवार को किया गया।
उपमुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी में आमेर के मिर्जा राजा जयसिंह द्वारा पुत्र रामसिंह को लिखे पत्र का अवलोकन किया। उन्होंने प्रदर्शनी में सवाई जयसिंह द्वारा (जयपुर शहर सन् 1727 ई. बसाने के दौरान) लिखे परवाना (लाईसेंस) का भी अवलोकन किया। जिसमें व्यापारियों को व्यापार-वाणिज्य को बढ़ावा देने के लिए व्यापारियों के मुखिया श्री रामकिशन को परवाना भेजा गया।
उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी को राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर के निदेशक श्री चंद्रसेन सिंह शेखावत ने अवगत कराया कि प्रदर्शनी में वकील रिपोर्ट, हिंदू महासभा कोटपूतली के लिए जयपुर राज्य परिषद् द्वारा पारित रिजोल्यूसन, वकील रिपोर्टस्, खरीते, अर्जदारत, आदेश, परवाना को प्रदर्शित किया गया है।
प्रदर्शनी में सन् 1885 ई. में जम्मू-कश्मीर के महाराजा के राज्याभिषेक पर उदयपुर महाराजा फतेहसिंह बहादुर जी को भेजा गया खरीता प्रदर्शित किया गया है। इसी प्रकार अलवर राज्य परिषद् द्वारा महिला शिक्षा पर विशेष बल संबंधित संकल्प भी इसी प्रदर्शनी में दिखाया गया है।
अलवर और भरतपुर राज्य के बीच रूपारेल नदी विवाद को सुलझाने के संबंध में किया गया एग्रीमेंट, झालावाड़ राज्य द्वारा बाल विवाह एक्ट सन् 1927 का के तहत बेमेल विवाह को रोकने संबंधित आदेश, उदयपुर राज्य महाराणा सरूप सिंह जी द्वारा कोटा महाराव को सती प्रथा रोकने संबंधी (बड़े साहब के आदेश के तहत) आदेश की नकल उक्त प्रदर्शनी में प्रदर्शित है।
उक्त अभिलेखों के अतिरिक्त समस्त 19 रियासतों के तत्कालीन नक्शे, राजचिह्न, इनके संस्थापकों और इनकी वंशावली संबंधित फोटो, सन् 1857 ई. की क्रांति (प्रथम स्वतंत्रता संग्राम) से संबंधित अति महत्वपूर्ण अभिलेख, बीकानेर स्टेट की ऊटों की सेना ‘गंगा रिसाला’ संबंधित अभिलेख को प्रदर्शित किया गया है।
प्रदर्शनी में डूंगरपुर-बांसवाड़ा राज्यों की पहाड़ी मानगढ़ पर सन् 1913 ई. में गोविन्द गुरू के नेतृत्व में हुए सम्मेलन पर ब्रिट्रिश सरकार द्वारा गोलियाँ चलाकर किया गया नरसंहार संबंधित ऐतिहासिक अभिलेख को प्रदर्शित किया गया।
चितौड़ के महाराणा प्रताप और अकबर के मध्य हुए हल्दीघाटी युद्ध सन् 1576 ई. के दौरान उनके घोड़े चेतक का घायल होना तथा उसकी मृत्यु पर महाराणा प्रताप द्वारा शोक संताप, गाँवों को भूमिदान देने संबंधित ताम्रपत्र को प्रदर्शित किया हैं।
प्रदर्शनी में वायसराय और गवर्नर-जनरल ऑफ इंडिया लॉर्ड लैंसडाउन (1888)का भरतपुर महाराज साहब को लिखा पत्र प्रदर्शित किया गया है। इसी प्रकार 1927 के हिंदी साहित्य सम्मेलन में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा लिका पत्र जैसे ऐतिहासिक दस्तावेज प्रदर्शनी में विशेष आकर्षण का केन्द्र हैं।
बीकानेर के पुस्तकालय में संधारित दुर्लभ पुस्तकों को भी प्रदर्शनी में आमजन के लिए प्रदर्शित किया गया है। जिसमें रिपोर्ट राज मारवाड़ 1891, बीकानेर गोल्डन जुबली 1887-1937, थॉमस हेडली द्वारा लिखित रुलर्स ऑफ़ इंडिया एंड द चीफ ऑफ़ राजपूताना, द किंग एंड क्वीन इन इंडिया 1911- 12, द प्रिंस इन इंडिया 1921-22, मेडिकल टोपोग्राफिकल अकाउंट ऑफ़ अजमेर राजपूताना -1900 इत्यादि पुस्तके के भी प्रदर्शित की गई है।
यह तीन दिवसीय प्रदर्शनी 19 मार्च तक तक जवाहर कला केन्द्र की अलंकार दीर्घा में सुबह 10 बजे से रात्रि 8 बजे तक नि:शुल्क देखी जा सकती है।


