राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर खंडपीठ ने पाली जिले स्थित जवाई लेपर्ड सफारी क्षेत्र को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने इस संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्र में नए व्यावसायिक निर्माण, खनन गतिविधियों और होटल-रिसॉर्ट के नए लाइसेंस जारी करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह आदेश जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जवाई लेपर्ड कंजर्वेशन रिजर्व और तेंदुओं की आवाजाही वाले पूरे क्षेत्र में किसी भी प्रकार का नया निर्माण नहीं किया जाएगा। हालांकि, गांवों की आबादी में पहले से वैध अनुमति प्राप्त निर्माण को इस आदेश से बाहर रखा गया है। अदालत ने यह भी कहा कि तेंदुओं के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वन विभाग द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (SOP) को तुरंत प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही राज्य सरकार और वन्यजीव बोर्ड को यह सुझाव भी दिया गया कि इस पूरे क्षेत्र को ‘अभयारण्य’ घोषित करने पर गंभीरता से विचार किया जाए, ताकि वन्यजीव संरक्षण को और मजबूत किया जा सके।
यह फैसला पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जवाई क्षेत्र अपने लेपर्ड सफारी और समृद्ध जैव विविधता के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। कोर्ट के इस निर्णय से जहां एक ओर तेंदुओं के प्राकृतिक आवास को सुरक्षा मिलेगी, वहीं अनियंत्रित विकास गतिविधियों पर भी लगाम लगेगी।


