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Reading: फिजिक्स का नोबेल 3 अमेरिकी वैज्ञानिकों को:मैक्रोस्कोपिक क्वांटम टनलिंग के लिए मिला; चिकित्सा, अंतरिक्ष और रक्षा तकनीक में फायदा होगा
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फिजिक्स का नोबेल 3 अमेरिकी वैज्ञानिकों को:मैक्रोस्कोपिक क्वांटम टनलिंग के लिए मिला; चिकित्सा, अंतरिक्ष और रक्षा तकनीक में फायदा होगा

Last updated: 07.10.2025 5:46 pm
Anjali Dadhich
Published: 07.10.2025

इस साल फिजिक्स का नोबेल पुरस्कार 3 अमेरिकी वैज्ञानिकों जॉन क्लार्क, मिशेल डेवोरेट, जॉन मार्टिनिस को मिला है। स्वीडन की रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने मंगलवार को इसकी घोषणा की।

यह पुरस्कार इलेक्ट्रिक सर्किट में बड़े पैमाने पर मैक्रोस्कोपिक क्वांटम टनलिंग और ऊर्जा के स्तरों की खोज के लिए मिला है।

क्वांटम टनलिंग वह प्रक्रिया है जिसमें कोई कण किसी बाधा (बैरियर) को कूदकर नहीं बल्कि उसके ‘आर-पार’ होकर निकल जाता है, जबकि सामान्य फिजिक्स के हिसाब से यह असंभव होना चाहिए।

आम जिंदगी में हम देखते हैं कि कोई गेंद दीवार से टकराकर वापस आ जाती है, लेकिन क्वांटम की दुनिया में छोटे कण कभी-कभी दीवार को पार कर दूसरी तरफ चले जाते हैं। इसे क्वांटम टनलिंग कहते हैं।

वैज्ञानिकों ने क्वांटम इफेक्ट को मानव स्तर पर भी साबित किया

रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने कहा कि इन वैज्ञानिकों ने यह साबित किया कि क्वांटम इफेक्ट मानव स्तर पर भी दिखाई दे सकते हैं। दरअसल, फिजिक्स में एक बुनियादी सवाल यह रहा है कि क्या क्वांटम इफेक्ट, जो आम तौर पर परमाणु और कणों तक सीमित रहते हैं, बड़े पैमाने पर भी दिखाई दे सकते हैं?

इसके लिए जॉन क्लार्क, मिशेल डेवोरेट और जॉन मार्टिनिस ने साल 1984 और 1985 में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में एक खास प्रयोग किया। उन्होंने दो सुपरकंडक्टर (ऐसे पदार्थ जो बिना रुकावट बिजली चला सकते हैं) से एक बिजली का सर्किट बनाया।

इन दोनों सुपरकंडक्टरों के बीच में एक पतली परत थी, जो बिजली को रोकती थी। फिर भी, उन्होंने देखा कि सर्किट में मौजूद सभी चार्ज किए हुए कण एक साथ मिलकर ऐसा व्यवहार करते थे, जैसे वे एक ही कण हों।

ये कण उस पतली परत को पार कर दूसरी तरफ जा सकते थे, जो क्वांटम टनलिंग का सबूत था। इस प्रयोग से वैज्ञानिकों ने यह कंट्रोल करना और समझना सीखा कि क्वांटम टनलिंग बड़े सिस्टम में कैसे काम करती है। यह खोज क्वांटम कंप्यूटिंग और नई तकनीकों के लिए बहुत बड़ी बात है।

इस खोज से भविष्य में क्वांटम कंप्यूटिंग और नई तकनीकों को विकसित करने में मदद मिल सकती है। क्वांटम टेक्नोलॉजी सेमीकंडक्टर, कम्प्यूटर और माइक्रो चिप्स में इस्तेमाल होती है। इससे चिकित्सा, अंतरिक्ष और रक्षा तकनीक को फायदा होगा।

नोबेल कमेटी बोली- 100 साल पुराना क्वांटम मैकेनिक्स आज भी हैरान करता है

नोबेल कमेटी के अध्यक्ष ओले एरिक्सन ने कहा कि सौ साल से भी पुराने क्वांटम मैकेनिक्स साइंस में नई खोजों हमें हैरान करती हैं। यह न सिर्फ दिलचस्प है, बल्कि बहुत काम की भी है। हमारे कंप्यूटर, स्मार्टफोन और इंटरनेट जैसी सारी डिजिटल चीजें इसी विज्ञान पर टिकी हैं।

वहीं, रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने मंगलवार को बताया कि कंप्यूटर चिप्स में इस्तेमाल होने वाले ट्रांजिस्टर (छोटे स्विच) क्वांटम तकनीक का एक शानदार उदाहरण है। इस साल के नोबेल विजेताओं की खोज से भविष्य में सुपर सिक्योर कोड (क्वांटम क्रिप्टोग्राफी), हाई स्पीड कंप्यूटर (क्वांटम कंप्यूटर) और सुपर एक्यूरेट सेंसर (क्वांटम सेंसर) जैसी चीजें बनाना आसान हो सकता है।

वैज्ञानिकों ने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में प्रयोग किया था

1984 और 1985 में, जॉन क्लार्क, मिशेल डेवोरेट और जॉन मार्टिनिस ने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में एक खास प्रयोग किया। उन्होंने दो सुपरकंडक्टर (ऐसे पदार्थ जो बिना रुकावट बिजली चला सकते हैं) से एक बिजली का सर्किट बनाया।

इन दोनों सुपरकंडक्टरों के बीच में एक पतली परत थी, जो बिजली को रोकती थी। फिर भी, उन्होंने देखा कि सर्किट में मौजूद सभी चार्ज किए हुए कण एक साथ मिलकर ऐसे व्यवहार करते थे, जैसे वे एक ही कण हों।

ये कण उस पतली परत को पार कर दूसरी तरफ जा सकते थे, जो क्वांटम टनलिंग का सबूत था। इस प्रयोग से वैज्ञानिकों ने यह कंट्रोल करना और समझना सीखा कि क्वांटम टनलिंग बड़े सिस्टम में कैसे काम करती है। यह खोज क्वांटम कंप्यूटिंग और नई तकनीकों के लिए बहुत बड़ी बात है।

क्वांटम मैकेनिक्स को समझिए

आमतौर पर क्वांटम मैकेनिक्स के नियम बहुत छोटे कणों, जैसे इलेक्ट्रॉन, पर लागू होते हैं। इन छोटे कणों के व्यवहार को माइक्रोस्कोपिक कहा जाता है, क्योंकि ये इतने छोटे होते हैं कि सामान्य माइक्रोस्कोप से भी नहीं दिखते। लेकिन अब इन वैज्ञानिकों ने पहली बार बिजली के सर्किट में “बड़े पैमाने” (मैक्रोस्कोपिक) पर क्वांटम टनलिंग और ऊर्जा के स्तरों की खोज की है।

आम जिंदगी में हम देखते हैं कि कोई गेंद दीवार से टकराकर वापस आ जाती है। लेकिन क्वांटम की दुनिया में छोटे कण कभी-कभी दीवार को पार कर दूसरी तरफ चले जाते हैं। इसे क्वांटम टनलिंग कहते हैं।

अब वैज्ञानिकों ने इस टनलिंग को बिजली के सर्किट जैसे बड़े सिस्टम में देखा है, जो पहले असंभव माना जाता था। इसके साथ ही, उन्होंने ऊर्जा के निश्चित स्तरों (क्वांटीकरण) को भी देखा, जो इस खोज को और खास बनाता है।

इस खोज से भविष्य में क्वांटम कंप्यूटिंग और नई तकनीकों को विकसित करने में मदद मिल सकती है। यह क्वांटम भौतिकी को रोजमर्रा की चीजों में इस्तेमाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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