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Reading: राजस्थान के जल भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल रामजल सेतु परियोजना- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
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राजस्थान के जल भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल रामजल सेतु परियोजना- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

Last updated: 11.07.2026 12:52 pm
Anjali Dadhich
Published: 11.07.2026

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी रामजल सेतु लिंक परियोजना की प्रगति पर उच्च स्तरीय चर्चा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना के सभी कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण किया जाए, ताकि निर्धारित समय-सीमा से पहले ही जनता को लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से मूर्त रूप लेने जा रही यह परियोजना पूर्वी राजस्थान के जल भविष्य को सुरक्षित करने की ऐतिहासिक पहल है, जिससे प्रदेश के लाखों लोगों को पेयजल, सिंचाई एवं औद्योगिक उपयोग के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रामजल सेतु परियोजना केवल एक जल परियोजना नहीं, बल्कि पूर्वी राजस्थान के समग्र सामाजिक एवं आर्थिक विकास का आधार बनेगी। यह परियोजना प्रदेश की भावी जल सुरक्षा, किसानों की समृद्धि तथा औद्योगिक विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए सभी संबंधित विभाग पूर्ण समन्वय के साथ कार्य करते हुए परियोजना के प्रत्येक चरण को निर्धारित टाइमलाइन में पूरा करें, ताकि इसका लाभ शीघ्रातिशीघ्र प्रदेश की जनता तक पहुंच सके।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना से जुड़े प्रत्येक घटक की नियमित निगरानी की जाए, मासिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि लंबित कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए तथा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं हो। मुख्यमंत्री ने परियोजना के विभिन्न पैकेजों एवं निर्माणाधीन कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री ने बीसलपुर से मोर सागर (अजमेर), ईसरदा से बंध बारेठा (भरतपुर), ईसरदा से रामगढ़ (जयपुर), खुरा-चैनपुरा से जयसमंद (अलवर) तथा ब्राह्मणी बैराज सहित विभिन्न घटकों की प्रगति की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। साथ ही परियोजना से जुड़े सभी निर्माण कार्यों का सतत एवं सघन पर्यवेक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए।

पुनर्वास एवं मुआवजा संबंधी कार्य पूरी संवेदनशीलता और पारदर्शिता से हों

मुख्यमंत्री ने परियोजना से प्रभावित परिवारों के हितों का विशेष ध्यान रखने पर बल देते हुए कहा कि पुनर्वास एवं मुआवजा संबंधी सभी कार्य संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं। एक भी परिवार को पुनर्वास या मुआवजे को लेकर परेशानी नहीं हो। उन्होंने कहा कि परियोजना से संबंधित अधिकारी कार्यों पर कड़ी निगरानी रखें, ताकि काम समय पर तो पूरा हो ही, क्वालिटी टेस्टिंग भी नियमित रूप से होती रहे।

24 हजार करोड़ रुपये से अधिक के कार्य प्रगतिरत,

नवनेरा एवं ईसरदा बांध का निर्माण कार्य पूरा—

बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव, जल संसाधन अभय कुमार ने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत 24 हजार करोड़ से अधिक के कार्य प्रगतिरत हैं। उन्होंने बताया कि नवनेरा बैराज एवं ईसरदा बांध का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। वहीं, रामगढ़ बैराज एवं महलपुर बैराज के ओवरफ्लो भाग का कार्य प्रगतिरत है, जिसके अन्तर्गत लगभग 600 क्यूबिक मीटर/प्रतिदिन कंक्रीटिंग का कार्य किया जा रहा है। इसी तरह परियोजना के अन्तर्गत एक महत्त्वपूर्ण घटक नवनेरा पम्प हाउस हेतु 10 लाख क्यूबिक मीटर मिट्टी खुदाई का कार्य भी प्रगतिरत है।

परियोजना के प्रमुख घटकों में कार्य तेजी से जारी—

उन्होंने बताया कि नवनेरा बैराज से मेज एनीकट तक 19 किलोमीटर फीडर नहर का निर्माण किया जाना है, जिसमें से लगभग 8 किलोमीटर फीडर का कार्य पूर्ण किया जा चुका है तथा शेष कार्य प्रगतिरत है। इसी तरह चंबल एक्वाडक्ट में 5 हजार 60 पाइलों में से लगभग 3 हजार 700 पाइलों का कार्य पूर्ण हो चुका है। वहीं, मेज नदी से गलवा बांध, गलवा बांध से ईसरदा बांध एवं गलवा बांध से बीसलपुर बांध के लिए पम्प हाउस व फीडर का कार्य प्रगतिरत है।

बैठक में बताया गया कि ईसरदा से खुरा चैनपुरा से बंध बरेठा, भरतपुर तक फीडर निर्माण कार्य के अन्तर्गत लगभग 180 किलोमीटर फीडर का निर्माण किया जाना है। जिसका कार्य आरम्भ हो चुका है। वर्तमान में हैड रेगुलेटर का कार्य प्रगतिरत है। इसी तरह बीसलपुर बांध से मोर सागर कृत्रिम रिजर्वायर तक जल अपवर्तन का कार्य आरम्भ किया जा चुका है। जिसके अन्तर्गत बीसलपुर बांध पर हैड रेगुलेटर का कार्य प्रगतिरत है एवं लाम्बा हरिसिंह बांध पर पम्प हाउस का कार्य आरम्भ कर दिया गया है।

इसी तरह ईसरदा बांध से रामगढ़ बांध जयपुर तक पेयजल हेतु जल अपवर्तन हेतु अलाइनमेंट का निर्धारण अंतिम चरण में है। जिसे शीघ्र अंतिम रूप दिया जाकर पाइपलाइन के माध्यम से जल का अपवर्तन रामगढ़ बांध तक किया जायेगा। ब्राह्मणी बैराज के लिए अलाइमेंट का निर्धारण किया जा चुका है तथा वनभूमि प्रत्यावर्तन एवं भूमि अवाप्ति का कार्य प्रगतिरत है। वहीं, खुरा चैनपुरा से जयसमंद अलवर तक जल अपवर्तन के कार्य के लिए अलाइनमेंट का परीक्षण अंतिम चरण में है।

2 हजार 330 करोड़ रुपये की लागत से चंबल एक्वाडक्ट का निर्माण—

बैठक में बताया गया कि परियोजना के प्रथम चरण के पैकेज-2 के अंतर्गत लगभग 2330 करोड़ रुपये की लागत से चंबल एक्वाडक्ट का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। यह एक्वाडक्ट एक ओर कोटा जिले की दीगोद तहसील के पीपलदा समेल गांव तथा दूसरी ओर बूंदी जिले की इन्द्रगढ़ तहसील के गोहाटा गांव को जोड़ेगा। इसके माध्यम से नवनेरा बैराज से पानी को लिफ्ट कर मेज नदी में छोड़ा जाएगा तथा वहां से विभिन्न पम्प हाउस एवं फीडर प्रणाली के माध्यम से गलवा बांध, बीसलपुर और ईसरदा बांध तक पहुंचाया जाएगा। इस एक्वाडक्ट के निर्माण से आमजन को आवागमन के लिए एक अतिरिक्त मार्ग भी उपलब्ध होगा।

प्रथम चरण में 17 जिलों की सवा तीन करोड़ आबादी होगी लाभान्वित—

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने पूर्ववर्ती परियोजना को व्यापक स्वरूप देते हुए इसे संशोधित रामजल सेतु लिंक परियोजना के रूप में विकसित किया है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 90 हजार करोड़ रुपये है। परियोजना के प्रथम चरण में प्रदेश के 17 जिलों की लगभग 3 करोड़ 25 लाख आबादी को पेयजल सुविधा उपलब्ध होगी। इसके साथ ही सिंचाई एवं उद्योगों के लिए भी पर्याप्त जल उपलब्ध होने से पूर्वी राजस्थान के आर्थिक, औद्योगिक एवं सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी।

परियोजना दूरदृष्टि और अंतरराज्यीय समन्वय का महत्वपूर्ण उदाहरण—

यह परियोजना मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रभावी नेतृत्व, दूरदृष्टि और अंतरराज्यीय समन्वय का महत्वपूर्ण उदाहरण है। राज्य सरकार के गठन के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर परियोजना को आगे बढ़ाया। जनवरी 2024 में परियोजना के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) संपादित किया गया तथा 17 दिसंबर 2024 को जयपुर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में राजस्थान, मध्यप्रदेश एवं भारत सरकार के मध्य त्रिपक्षीय समझौते का आदान-प्रदान हुआ।

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