राजस्थान में एक नए वेदर सिस्टम के असर से मौसम ने अचानक करवट ले ली है। राजधानी जयपुर समेत 10 से अधिक जिलों में बारिश हुई, जबकि नागौर-टोंक में ओलावृष्टि भी दर्ज की गई। तेज आंधी और बारिश के चलते किसानों और व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
मौसम केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा के अनुसार 8 अप्रैल तक इस सिस्टम का असर बना रहेगा, जबकि 9 अप्रैल से मौसम साफ होने की संभावना है। मंगलवार सुबह से ही राज्य के कई हिस्सों में बारिश का दौर शुरू हो गया। बीकानेर, जैसलमेर, श्रीगंगानगर में तेज बारिश और ठंडी हवाओं के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली।
हालांकि, इस बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। नागौर की मंडियों में आंधी-बारिश की चेतावनी के चलते अवकाश घोषित करना पड़ा। मेड़ता मंडी में खुले में रखी फसल भीग गई। वहीं, डीडवाना क्षेत्र में तेज हवा और बारिश के कारण गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई।

जोधपुर में भी मूसलाधार बारिश के कारण सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई। कई इलाकों में ओले गिरने से जनजीवन प्रभावित हुआ। टोंक जिले के गांवों में तेज आंधी से पेड़ गिर गए, जिससे यातायात बाधित हो गया।
जयपुर के गोविंदगढ़, ढोढसर और खेजरोली क्षेत्रों में बारिश ने गेहूं की कटाई को प्रभावित किया है। अजमेर में भी सुबह से रिमझिम बारिश और ठंडी हवाओं का दौर जारी रहा, जिससे मौसम सुहावना हो गया लेकिन किसानों और व्यापारियों को नुकसान हुआ।
सीकर में तेज बारिश के कारण स्कूल और ऑफिस जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, लगातार हो रही बारिश से मंडी व्यापारियों को भी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार पिछले 20 दिनों में सक्रिय हुए कई वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कारण गर्मी का असर कम रहा है, जिससे मानसून पर भी प्रभाव पड़ सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार जुलाई-अगस्त के दौरान अल-नीनो के सक्रिय होने की 60 से 80 प्रतिशत संभावना है, जिससे मानसून कमजोर रह सकता है।
इस तरह एक ओर जहां बारिश ने गर्मी से राहत दी है, वहीं दूसरी ओर किसानों के लिए यह मौसम मुसीबत बन गया है।


