लोन लेने की योजना बना रहे लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अब लोन लेने के लिए CIBIL स्कोर अनिवार्य नहीं होगा। खासतौर पर पहली बार लोन लेने वाले लोगों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। यह नया नियम 12 दिसंबर से लागू हो गया है, जिससे लाखों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का CIBIL स्कोर कम है या बिल्कुल नहीं है, तो केवल इसी आधार पर बैंक या वित्तीय संस्थान उसका लोन आवेदन खारिज नहीं कर सकते। यह फैसला उन लोगों के लिए अहम है, जो पहली बार लोन लेने जा रहे हैं और जिनके पास अब तक कोई क्रेडिट हिस्ट्री नहीं है।
इस संबंध में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने किसी भी तरह की न्यूनतम क्रेडिट स्कोर की अनिवार्यता तय नहीं की है, खासकर पहली बार लोन लेने वालों के लिए। RBI ने 6 जनवरी 2025 को एक मास्टर डायरेक्शन जारी किया था, जिसमें बैंकों और एनबीएफसी को निर्देश दिए गए थे कि केवल क्रेडिट हिस्ट्री न होने के कारण लोन आवेदन को अस्वीकार न किया जाए।
हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि बिना किसी जांच-पड़ताल के लोन दे दिया जाएगा। बैंक और वित्तीय संस्थान अभी भी लोन लेने वाले की आय, नौकरी या व्यवसाय, लोन चुकाने की क्षमता और वित्तीय विश्वसनीयता की पूरी जांच करेंगे। बैंक आपकी क्रेडिट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट, पिछले लोन का भुगतान रिकॉर्ड, किसी तरह की डिफॉल्ट हिस्ट्री, लोन सेटलमेंट या रिस्ट्रक्चरिंग जैसी जानकारियों को आधार बना सकते हैं।
वित्त मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि क्रेडिट रिपोर्ट लेने की फीस ₹100 से अधिक नहीं होगी। इसके अलावा, हर व्यक्ति को साल में एक बार अपनी पूरी क्रेडिट रिपोर्ट, जिसमें CIBIL स्कोर भी शामिल है, मुफ्त में इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में उपलब्ध कराई जाएगी, बशर्ते उसकी क्रेडिट हिस्ट्री मौजूद हो।
CIBIL स्कोर को लेकर फैल रही अफवाहों पर सरकार ने साफ किया है कि CIBIL स्कोर न तो बंद किया जा रहा है और न ही इसे किसी सरकारी संस्था से बदला गया है। CIBIL और अन्य क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियां पहले की तरह RBI की निगरानी में काम करती रहेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से लोन सिस्टम ज्यादा समावेशी बनेगा। पहली बार लोन लेने वाले युवा, स्टार्टअप्स और छोटे कारोबारियों को अब केवल क्रेडिट हिस्ट्री न होने की वजह से निराश नहीं होना पड़ेगा। यह कदम देश में वित्तीय पहुंच को बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों को गति देने में अहम भूमिका निभा सकता है।


