राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित अखिल भारतीय संस्थागत नेतृत्व समागम 2026 के समापन समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे की मौजदूगी में विद्या भारती की पहल को साधुवाद बताते हुये कहा कि युवाओं को सही दिशा देने के लिये यह राष्ट्रीय संकल्प लेने का अवसर है। उन्होंने इस विषय को सामयिक और प्रासंगिक बताते हुये कहा कि भारत के भविष्य को सुदृढ़ करने के लिये हमें युवाओं को संस्कार, संस्कृति और समृद्ध परम्पराओं को बताना होगा।
स्पीकर देवनानी ने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिये युवाओं को तैयार करें। उनका मनोबल बढ़ाने वाली दृष्टि देने और व्यवहारिक स्वरूप तय करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संस्थायें सही आचरण, लक्ष्य की स्पष्टता और युगानुकूल सोच के साथ आगे बढ़े। वासुदेव देवनानी ने कहा कि अब समय आ गया है कि आत्मनिर्भर भारत के साथ युवाओं को संस्कारवान बनायें। संस्थागत विकास योजनाएँ केवल औपचारिक दस्तावेज़ बनकर सीमित न रहें बल्कि वे राष्ट्र निर्माण का सशक्त और क्रियान्वित करने योग्य रोडमैप बनें। प्रत्येक विश्वविद्यालय और महाविद्यालय को अपनी योजनाओं को स्थानीय आवश्यकताओं तथा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जोड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राजस्थान जैसे राज्य में जल संरक्षण, सौर ऊर्जा, कृषि नवाचार, कौशल विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे विषयों को शिक्षा और शोध से जोड़ना समय की माँग है। जब विश्वविद्यालय समाज से सीधे जुड़ेंगे, तभी शिक्षा वास्तविक परिवर्तन का माध्यम बनेगी। वासुदेव देवनानी ने कहा कि किसी भी शिक्षा व्यवस्था की आत्मा उसके शिक्षक होते हैं। संकाय को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना होगा। नई तकनीकों, आधुनिक शोध पद्धतियों और नवाचारों से उन्हें निरंतर सशक्त करना आवश्यक है।
वासुदेव देवनानी ने यह भी कहा कि नेतृत्व केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं है, बल्कि दूरदृष्टि और मूल्य आधारित निर्णयों का समन्वय है। एक प्रेरक और प्रतिबद्ध नेतृत्व किसी भी संस्था को नई ऊँचाइयों तक पहुँचा सकता है। वासुदेव देवनानी ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्रदान करने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, कौशल विकास और राष्ट्र चेतना का आधार है। हमें ऐसी संस्थाएँ विकसित करनी होंगी जो ज्ञान के साथ संस्कार भी दें, नवाचार के साथ नैतिकता भी सिखाएँ और वैश्विक दृष्टि के साथ भारतीय आत्मा को संजोए रखें।


