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सीएम भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में एकलव्य स्कूल बना रहे सुनहरा भविष्य,किसानों और मजदूरों के बच्चे पढ़-लिखकर बन रहे डॉक्टर और इंजीनियर

Last updated: 19.01.2026 12:44 pm
Anjali Dadhich
Published: 19.01.2026

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य के सुदूर जनजाति अंचलों में एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (ईएमआरएस) शिक्षा, समरसता और सामाजिक सुरक्षा के क्षितिज पर सूरज की तरह चमक रहे हैं। राज्य के 31 एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूलों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के बच्चे नीट, आईआईटी, जेईई जैसी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, कंप्यूटर लैब, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जैसे नवाचार जनजातीय बालक-बालिकाओं के सपनों में नए रंग भर रहे हैं। 

ईएमआरएस में पढ़ रहे 11 हजार 619 अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्र-छात्राओं की प्रतिभा की रोशनी से जनजाति क्षेत्रों में हजारों घर-परिवार भी उम्मीदों से रोशन हैं। इनमें 6 हजार 710 बालक और 4 हजार 909 बालिकाएं शामिल हैं। अभावों में अपने बच्चों के भविष्य को लेकर आशंकित माता-पिता की आंखों में नौनिहालों के सुनहरे भविष्य की चमक और चेहरे पर आत्मविश्वास की झलक साफ देखी जा सकती है। राज्य के ईएमआरएस में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित भविष्य की गारंटी का असर है कि सत्र 2024-25 में 9 हजार 999 बच्चों के मुकाबले शैक्षणिक सत्र 2025-26 में 1 हजार 620 अधिक विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। प्रवेश परीक्षा में बैठने वाले बच्चों की संख्या भी साल दर साल बढ़ी है। 

शिक्षा के साथ आवास, भोजन और किताबें भी निःशुल्क

राजस्थान स्टेट एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल सोसायटी द्वारा राज्य में संचालित सीबीएसई से संबद्ध 31 एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल विद्यालयों में से नवीनतम 31वां विद्यालय जमवारामगढ़ (जयपुर) में जून 2025 से प्रारंभ किया गया है। सभी ईएमआरएस विद्यालयों में कक्षा 6 से 12 तक कक्षाएं संचालित होती हैं। कक्षा 11 एवं 12 में विज्ञान और कला संकाय उपलब्ध हैं। विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा, पाठ्यपुस्तकें, आवास, भोजन, पौष्टिक आहार, जूते-मौजे सहित दैनिक उपयोग की सामग्री उपलब्ध करवाई जाती है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एंड वर्चुअल रिएलिटी, इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर, ब्यूटी एंड वेलनेस, एग्रीकल्चर तथा ऑटोमोटिव स्किल लैब्स में इन विद्यालयों में संचालित की जा रही हैं।

इन विद्यालयों में शिक्षा के साथ-साथ खेल-कूद और सह-शैक्षिक गतिविधियों पर भी पूरा ध्यान दिया जाता है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में राज्य स्तरीय स्टेट स्पोर्ट्स मीट-2025 उदयपुर में से चयनित 154 विद्यार्थियों ने ओडिशा के राउरकेला में आयोजित नेशनल स्पोर्ट्स मीट-2025 में राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए 9 इवेंट्स में पदक अर्जित किए। वहीं, राज्य स्तरीय सांस्कृतिक एवं साहित्यिक फेस्ट-2025 उदयपुर में से चयनित 59 विद्यार्थियों ने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक एवं साहित्यिक फेस्ट-2025 में भाग लिया। 

जेईई और नीट की तैयारी के लिए विशेष व्यवस्था

एकलव्य विद्यालयों में बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ करियर मार्गदर्शन देकर भविष्य के लिए सही दिशा भी दिखाई जाती है। इन विद्यालयों में कक्षा 9 से 11 तक अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए इनेबल कार्यक्रम के अंतर्गत टाटा मोटर्स के सहयोग से आईआईटी-जेईई और नीट की तैयारी के लिए प्रतिदिन ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। दक्षणा कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित नेशनल लेवल परीक्षा में चयनित 12 विद्यार्थियों को भोपाल (मध्यप्रदेश) में आईआईटी, जेईई और नीट की विशेष कोचिंग दी जा रही है। ईएमआरएस बिहारीपुरा, जयपुर के छात्र मोहनलाल मीना, अनिकेश मीना और ईएमआरएस बरनाला, सवाईमाधोपुर की छात्रा राजकुमारी मीना ने नेशनल एलीजिबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट (नीट) परीक्षा में चयनित होकर राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालयों से एमबीबीएस कर रहे हैं। 

ईएमआरएस से एमबीबीएस तक का सफर

सवाईमाधोपुर जिले में बामनवास तहसील के बरनाला के पास एक गांव की रहने वाली राजकुमारी मीना के किसान पिता का सपना था कि उनकी बेटी बड़ी होकर डॉक्टर बने। राजकुमारी ने बताया कि उनके गांव में बायोलॉजी नहीं थी। सरकारी स्कूल से दसवीं में 93 फीसदी से उत्तीर्ण होने के बाद ईएमआरएस प्रवेश परीक्षा दी और ईएमआरएस बरनाला में उनको प्रवेश मिल गया। आज वे गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, भावनगर में एमबीबीएस सैकंड ईयर की छात्रा हैं। राजकुमारी ने बताया कि हर कोई प्राइवेट स्कूल में नहीं पढ़ सकता और न ही महंगी कोचिंग कर सकता। एमबीबीएस के बाद वे एमडी मेडिसिन करना चाहती हैं। राजकुमारी का छोटा भाई भी ईएमआरएस में पढ़ रहा है। 

इसी तरह ईएमआरएस बिहारीपुरा, जयपुर के छात्र अनिकेश मीना पश्चिम बंगाल के चौबीस परगना जिले में डायमंड हार्बर गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रहे हैं। अनिकेश ने बताया कि वे करौली के नादौती के पास एक गांव के रहने वाले हैं। पिताजी किसान हैं। ईएमआरएस में छठी कक्षा में प्रवेश लेने के बाद से उनकी जिंदगी बदल गई। ईएमआरएस की बदौलत ही उन्हें नीट परीक्षा में सफलता मिली। अनिकेश कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं। 

पिता गुजरात में हमाली करते हैं, बेटा पढ़ रहा डॉक्टरी

जयपुर के बस्सी के पास के किशनपुरा गांव के रहने वाले मोहनलाल मीना के पिता गुजरात के सिद्धपुर में ईसबगोल की बोरियां उठाते हैं। मोहन ने बताया कि उन्होंने छठी कक्षा में ईएमआरएस में दाखिला लिया। ईएमआरएस में शिक्षकों ने ही उन्होंने बताया कि डॉक्टर कैसे बन सकते हैं। ईएमआरएस में रहकर ही नीट की तैयारी की और आज वे पंजाब के फरीदकोट में गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रहे हैं। मोहन एमबीबीएस के बाद जनरल फिजिशियन बनना चाहते हैं।

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