मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राज्य में कार्यरत सिटी गैस डिस्ट्रिब्यूशन संस्थाओं को प्रतिदिन औसतन ढाई हजार से तीन हजार परिवारों तक पाइपलाइन के माध्यम से घरेलू गैस (डीपीएनजी) कनेक्शन जारी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में डीपीएनजी की आधारभूत संरचना विकसित हो चुकी है, वहां के परिवारों को डीपीएनजी सेवाओं से जोड़ना केंद्र एवं राज्य सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सचिवालय में राज्य में कार्यरत 13 सीजीडी संस्थाओं के शीर्ष स्तर के अधिकारियों एवं स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ डीपीएनजी संरचना की स्थिति तथा डीपीएनजी सुविधा से जोड़ने की कार्ययोजना पर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने वर्चुअल बैठक में स्पष्ट किया कि जिन क्षेत्रों में डीपीएनजी की आधारभूत संरचना विकसित हो गई है, वहां क्षेत्रवासियों को एलपीजी से पाइपलाइन गैस सुविधा से जोड़ना केंद्र सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं। साथ ही इन क्षेत्रों की औद्योगिक एवं व्यावसायिक इकाइयों को भी पाइपलाइन से प्राकृतिक गैस कनेक्शन से जोड़ा जाना है।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जिला कलक्टरों को निर्देश दिए कि जनजागरूकता अभियान चलाकर नागरिकों को एलपीजी से डीपीएनजी सुविधाओं से जोड़ने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि डीपीएनजी की सस्ती दर, 24×7 सेवा उपलब्धता, बुकिंग की झंझट से मुक्ति, सुरक्षित, स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा जैसे लाभों के बारे में व्यापक जानकारी दी जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग डीपीएनजी सेवाओं से जुड़ सकें।
अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस एवं पेट्रोलियम अपर्णा अरोरा ने बताया कि विभाग द्वारा राज्य के 17 भौगोलिक क्षेत्रों में कार्यरत 13 सीजीडी संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि सीजीडी संस्थाओं को तीन माह में पीएनजी कनेक्शनों की संख्या एक लाख 25 हजार से बढ़ाकर 5 लाख करने का लक्ष्य दिया गया है।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के सचिव अम्बरीश कुमार ने बताया कि राज्य में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता है तथा राज्य सरकार स्तर पर इसकी नियमित समीक्षा की जा रही है।
बैठक में राजस्थान स्टेट गैस के प्रबंध निदेशक श्री रणवीर सिंह ने डीपीएनजी कनेक्शनों की वर्तमान स्थिति एवं भावी कार्यक्रम की जानकारी दी।


