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ई-नाम प्लेटफॉर्म पर व्यापार में राजस्थान प्रथम स्थान पर—ई-नाम पर कुल आवक के मामले में देश में दूसरे नंबर पर रहा प्रदेश

Last updated: 24.04.2026 12:55 pm
Anjali Dadhich
Published: 24.04.2026

राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) प्लेटफॉर्म देश में मंडियों को डिजिटल रूप से एकीकृत कर पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-आधारित कृषि व्यापार को आसान बना रहा है। राजस्थान में 173 मंडियों के ई-नाम में जुड़ने से लाखों किसानों सहित सभी हितधारकों के लिए अवसरों का विस्तार हुआ है और पारदर्शी एवं कुशल कृषि विपणन को गति मिली है। यही नहीं, प्रदेश के किसान अब ई-नाम के माध्यम से अपने कृषि उत्पादों को देश भर में बेच कर अपनी उपज के अधिक दाम पा रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी बढ़ाने में मदद मिल रही है। 

किसान सिर्फ स्थानीय मंडियों तक सीमित नहीं रहें, वे देशभर के खरीददारों को ऑनलाइन बिकवाली कर अपनी उपज का सही मूल्य ले सकें, इस उद्देश्य से देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) प्लेटफॉर्म की शुरुआत 14 अप्रेल, 2016 को की गई थी। इस प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन नीलामी प्रक्रिया से खरीददार और विक्रेता दोनों के लिए पारदर्शिता सुनिश्चित होती है। किसान रीयल-टाइम में कीमतों का पता लगा सकते हैं और बेहतर निर्णय ले सकते हैं। फसल बेचने के बाद सीधे किसानों के बैंक खातों में डिजिटल भुगतान की सुविधा है। व्यापारियों को पूरे राज्य के लिए एकल लाइसेंस मिलता है, जो राज्य के सभी बाजारों में मान्य होता है। ई-नाम पोर्टल का नवीन संस्करण ई-नाम 2.0 केन्द्र सरकार द्वारा 12 फरवरी 2026 से लागू किया गया है। इस नए प्लेटफॉर्म का उद्देश्य स्वचालित बोली प्रणाली, मांग-आपूर्ति डेटा, लॉजिस्टिक्स और फिनटेक सहायता जैसी सुविधाओं के द्वारा अंतर-राज्यीय कृषि व्यापार को बढ़ावा देना है।  

3.16 करोड़ मीट्रिक टन कृषि उपज का व्यापार, कीमत 1.30 लाख करोड़ से अधिक—

राजस्थान में ई-नाम के माध्यम से 15 लाख 55 हजार से अधिक किसान, 87 हजार 509 व्यापारी और 27 हजार 989 कमीशन एजेंट्स को एक मंच पर लाया गया है। प्रदेश में 546 किसान-उत्पादक संगठन (एफपीओ) ई-नाम प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत हैं। ई-नाम के जरिए राजस्थान में 138 वस्तुओं का व्यापार किया जा रहा है। जैसे-जैसे यह प्लेटफॉर्म विकसित हो रहा है, बाजार संपर्क बढ़ रहा है और व्यापार में भी तेजी आ रही है। 2016 से जनवरी 2026 तक ई-नाम प्लेटफॉर्म पर राजस्थान में 3.16 करोड़ मीट्रिक टन कृषि उपज का व्यापार हुआ है, जिसका कुल मूल्य एक लाख 30 हजार 772 करोड़ रुपए से अधिक है। इस तरह ई-नाम प्लेटफॉर्म पर कुल आवक के मामले में राजस्थान दस साल में दूसरे एवं ई-ट्रेड में प्रथम स्थान पर रहा है। 

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान में उपज के गुणवत्ता मूल्यांकन में एआई के उपयोग की पहल भी की गई है। वर्तमान में राजस्थान में 134 ई-नाम मंडियां कृषि उत्पादों की गुणवत्ता जांच के लिए एआई-आधारित और एमएल-आधारित मशीनों का उपयोग कर रही हैं। इससे परीक्षण के समय में उल्लेखनीय कमी आई है। 

डिजिटल भुगतान को बढ़ावा, ई-पेमेंट में भी राजस्थान चौथे स्थान पर—

ई-नाम प्लेटफॉर्म डिजिटल भुगतान प्रणालियों को प्रोत्साहित करता है, जिससे किसानों के वित्तीय समावेशन में मदद मिल रही है। ई-ट्रांजेक्शन के सत्यापन योग्य वित्तीय रिकॉर्ड तैयार होने से संस्थागत ऋण और अन्य वित्तीय सेवाओं तक किसानों की पहुंच बढ़ती है। राजस्थान में 44 हजार 711 सौदों में 505 करोड़ रुपए से अधिक का ई-भुगतान किया गया है। ई-भुगतान में राजस्थान देश में चौथे स्थान पर रहा है। 

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में ई-नाम प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए ई-भुगतान प्रोत्साहन योजना को कृषक उपहार योजना में शामिल किया गया है। इस तरह ई-नाम के जरिए भुगतान प्राप्त करने वाले किसानों के साथ-साथ ई-भुगतान करने वाले व्यापारियों को भी नकद पुरस्कार हेतु लॉटरी में शामिल किया जा रहा है।  केवल ई-पेमेंट पर ही उपहार कूपन जारी किए जाने से किसान और व्यापारी ई-नाम पोर्टल पर बिक्री और तत्काल एवं सुरक्षित डिजिटल लेन-देन के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

ई-नाम उपयोगकर्ता टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 18002700224 के जरिए अपनी शिकायतों के बारे में सहायता भी प्राप्त कर सकते हैं। किसानों और डिजिटल बाजार में पहली बार आने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए समस्याओं के समय पर समाधान और निरंतर तकनीकी सहायता मुहैया कराने में यह विशेष रूप से मददगार है। 

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