पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में इस बार बीजेपी की ऐतिहासिक जीत के साथ कई राजनीतिक चेहरे चर्चा में हैं, जिनमें राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। मुख्यमंत्री का चुनावी प्रदर्शन खासा प्रभावशाली रहा, जहां उन्होंने जिन 6 सीटों पर सभाएं और रोड शो किए, उन सभी सीटों पर बीजेपी को जीत हासिल हुई। इसे उनका 100 प्रतिशत स्ट्राइक रेट माना जा रहा है।
सीएम भजनलाल शर्मा ने सिलीगुड़ी, भवानीपुर, बाली, हावड़ा उत्तर, बारानगर और बैरकपुर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में जनसभाएं कीं और प्रचार अभियान को गति दी। इन क्षेत्रों में बीजेपी की जीत ने उनकी चुनावी रणनीति और जनसंपर्क की प्रभावशीलता को साबित किया है।
इस जीत में प्रवासी राजस्थानियों की भूमिका भी बेहद अहम रही। बंगाल में व्यापार और उद्योग से जुड़े राजस्थानियों का बड़ा वर्ग है, जिसे चुनावों में सक्रिय करने के लिए विशेष रणनीति बनाई गई थी। राजस्थान के नेताओं को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि वे इस समुदाय को एकजुट करें और मतदान में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करें।
चुनाव अभियान में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रभारी के तौर पर माइक्रो प्लानिंग के जरिए रणनीति को जमीन पर उतारा। वहीं सुनील बंसल ने संगठनात्मक स्तर पर मजबूत पकड़ बनाए रखी और हाईकमान से लेकर बूथ स्तर तक समन्वय किया।
भवानीपुर सीट पर विशेष ध्यान दिया गया, जहां पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने महीनों तक डेरा डालकर चुनाव प्रबंधन संभाला। उनकी रणनीति के चलते ही ममता बनर्जी को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा, जो इस चुनाव का बड़ा राजनीतिक मोड़ साबित हुआ।
इसके अलावा, केरल में भी सीएम भजनलाल शर्मा सक्रिय नजर आए, जहां उन्होंने राजीव चंद्रशेखर के नामांकन में भाग लेकर उनके समर्थन में प्रचार किया। राजीव चंद्रशेखर ने नेमोम सीट से जीत दर्ज की।
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल चुनावों में बीजेपी की जीत के पीछे मजबूत रणनीति, संगठन और प्रवासी समुदाय की भागीदारी का बड़ा योगदान रहा, जिसमें राजस्थान के नेताओं की भूमिका निर्णायक साबित हुई।


