मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की अगुवाई अधिवक्ताओं ने की, जिसमें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर सहित प्रमुख नाम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हमारे संविधान का निर्माण इन्हीं विधिवेत्ताओं की दूरदर्शिता का परिणाम है, जिससे यह विश्व का सबसे विस्तृत और जीवंत संविधान है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर के शपथ ग्रहण एवं स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस एसोसिएशन ने अपना बहुमूल्य समय न्याय सुनिश्चित करने के लिए समर्पित किया है। साढ़े तीन हजार से अधिक अधिवक्ताओं की यह संस्था शक्ति और एकता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि 50 वर्षों में इस संस्था ने अनेक कीर्तिमान स्थापित किए हैं।
अधिवक्ता मौलिक अधिकारों के रक्षक और लोकतंत्र के प्रहरी-
मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिवक्ता केवल वकालत नहीं करते, वे समाज की आत्मा की आवाज बनते हैं। शोषित की पुकार सुनते हैं और उसे न्याय दिलाते हैं। साथ ही, न्याय व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी भी हैं। अधिवक्ता मौलिक अधिकारों के रक्षक और लोकतंत्र के प्रहरी हैं। इनकी तर्कशक्ति, ज्ञान और प्रतिबद्धता ही न्याय का आधार है। उन्होंने कहा कि हर लोकतांत्रिक व्यवस्था तभी सशक्त बनती है, जब वह जनमानस का भरोसा हासिल करती है। आमजन की यही आस्था और विश्वसनीयता हमारी न्यायिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है।
तीन नए कानूनों को जमीनी स्तर पर किया जा रहा लागू-
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है। राजस्थान सरकार का स्पष्ट मानना है कि बिना त्वरित न्याय के विकास अधूरा है। ‘न्याय में देरी, न्याय से इनकार के समान है’- इस कथन को हमारी सरकार गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में तीन नए कानून को जमीनी स्तर पर लागू किया जा रहा है। इन नए कानूनो के माध्यम से राजस्थान देश में सबसे तीव्र गति से न्याय पहुंचाने वाले राज्यों में से एक बन गया है। भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को राजस्थान ने तेजी से अपनाया है।

राज्य सरकार ने 42 नए न्यायालय स्थापित किए-
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने न्यायपालिका को मजबूत बनाने के लिए 42 नए न्यायालय स्थापित किए हैं। फलौदी, खैरथल-तिजारा सहित कुल 8 जिला एवं सेशन न्यायालयों का सृजन किया गया है। उन्होंने कहा कि बड़ी सादड़ी एवं केशोरायपाटन कैम्प कोर्ट के स्थान पर नियमित अतिरिक्त जिला एवं सेशन न्यायलय तथा हनुमानगढ़, सवाईमाधोपुर, चुरू, बीकानेर एवं जोधपुर में विशेष (पॉक्सो एक्ट) न्यायालय का सृजन किया गया है। वहीं, झुंझुनू में विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (एन.आई. एक्ट) न्यायालय का सृजन तथा पहाडी (डीग) एवं खैरथल-तिजारा में सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय का सृजन किया गया है।
राजस्थान में हो रहा न्यायिक सेवाओं का विस्तार-
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान में ई-कोर्टस का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई, ऑनलाइन केस फाइलिंग, ई-पेमेंट जैसी सुविधाओं से वादियों और अधिवक्ताओं दोनों को लाभ हो रहा है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के दूर-दराज के गांवों तक न्याय पहुंचाने के लिए न्यायिक सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। लंबित मामलों के त्वरित निपटान हेतु फास्ट ट्रैक कोर्ट्स एवं विशेष अदालतों की संख्या बढ़ाई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार की प्राथमिकता में राजस्थान के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाना है तथा अधिवक्ताओं के सहयोग से ही यह संभव हो सकता है। उन्होंने कहा कि लोक अदालतों का व्यापक विस्तार किया जा रहा है, ताकि आम नागरिक को शीघ्र और निःशुल्क न्याय मिल सके। साथ ही, विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निर्धन वादियों को निःशुल्क कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
इससे पहले समारोह में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा ने राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर की नवीन कार्यकारिणी के पदाधिकारियों को शपथ दिलाई।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ की नवनिर्मित अंडरग्राउंड वाहन पार्किंग का भी लोकार्पण किया।


