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राजस्थान विज्ञान महोत्सव—2026 का भव्य शुभारंभ—ज्ञान,नवाचार और संस्कार से ही बनेगा विकसित भारत – विधान सभा अध्यक्ष

Last updated: 27.02.2026 2:21 pm
Anjali Dadhich
Published: 27.02.2026

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी (एमएनआईटी), जयपुर में तीन दिवसीय राजस्थान विज्ञान महोत्सव—2026 का गरिमामय शुभारंभ हुआ। इस वर्ष महोत्सव की थीम “विज्ञान में महिलाएँ – विकसित भारत की उत्प्रेरक” रखी गई है। कार्यक्रम का आयोजन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, राजस्थान सरकार, विज्ञान भारती राजस्थान तथा एमएनआईटी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

उद्घाटन समारोह में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत की वैज्ञानिक परंपरा में महिला शक्ति सदैव सृजन, ज्ञान और नवाचार की प्रेरक रही है तथा विकसित भारत@2047 के निर्माण में महिलाओं की भूमिका निर्णायक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित विषय नहीं, बल्कि यह समाज के समग्र विकास और मानवीय मूल्यों से जुड़ी जीवन-दृष्टि है। उन्होंने भारतीय परंपरा में गार्गी, मैत्रेयी और लोपामुद्रा जैसी विदुषियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राचीन काल से ही महिलाओं ने वेद, दर्शन और प्रकृति विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आधुनिक भारत में भी कल्पना चावला, टेसी थॉमस  और रितु करिधल जैसी वैज्ञानिकों की उपलब्धियाँ देश की वैज्ञानिक क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि अवसर और संसाधन मिलने पर भारतीय बेटियाँ वैश्विक स्तर पर उत्कृष्टता स्थापित कर रही हैं।

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सुशासन में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “अधिकतम शासन, न्यूनतम सरकार” का लक्ष्य तकनीक के माध्यम से ही संभव है। जन-धन, आधार और मोबाइल (जैम ट्रिनिटी) ने “सबका साथ, सबका विकास” को सशक्त आधार प्रदान किया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के माध्यम से फेस ऑथेंटिकेशन द्वारा 2 करोड़ से अधिक पेंशनभोगियों के लिए डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र की प्रक्रिया 30 सेकंड में पूर्ण की जा रही है। साथ ही ”सीपीग्राम” में एआई आधारित डेटा विश्लेषण तथा ‘सर्वम’ जैसे बहुभाषी एआई प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिक अपनी मातृभाषा में शिकायत दर्ज कर उत्तर प्राप्त कर सकते हैं। मुख्य सचिव ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से राज्य के सभी विद्यालयों में विज्ञान क्लब स्थापित करने तथा विज्ञान प्रदर्शनियों को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीक को अपनाने से राजस्थान में सकारात्मक परिवर्तन आया है और दूरस्थ क्षेत्रों के लोग ई-मित्र, बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट तथा राष्ट्रीय कृषि बाज़ार (ई-नाम) जैसी पहलों का लाभ उठा रहे हैं। वर्ष 1989 में जहाँ उनके वर्ग में केवल तीन छात्राएँ थीं, वहीं आज तकनीकी संस्थानों और आईटीआई में लगभग 50% तक महिलाओं की भागीदारी विज्ञान एवं कौशल क्षेत्रों में बढ़ती सशक्त उपस्थिति को दर्शाती है। उन्होंने एन. कलाइसेल्वी का उल्लेख करते हुए महिला नेतृत्व को प्रेरणादायक बताया।

प्रशासनिक विज्ञान और अकादमिक सहयोग पर चर्चा करते हुए उन्होंने लोक प्रशासन को एक विज्ञान के रूप में स्वीकार करने, अंतर्विषयी दृष्टिकोण अपनाने तथा ‘नेशनल सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस’ के साथ प्रशिक्षण एवं अनुसंधान सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।

अंत में मुख्य अतिथि ने एमएनआईटी और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएँ देते हुए प्रतिभागियों से वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ज्ञान को संस्कार से, विज्ञान को मूल्य से और तकनीक को मानवता से जोड़कर ही भारत विश्व नेतृत्व की दिशा में अग्रसर होगा।

महोत्सव के प्रथम दिन गुरुवार को राजस्थान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति पर एक बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के पूर्व सचिव पद्मश्री श्री आशुतोष शर्मा, शासन सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग वी. सरवण कुमार, पूर्णेन्दु घोष, पी.सी. त्रिवेदी  तथा विप्रो के सचिव सहित अन्य विशेषज्ञों ने नीति की आवश्यकता पर बल देते हुए इसके निर्माण की प्रक्रिया पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए। 

बैठक में आमजन एवं बुद्धिजीवियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर भी दिए गए। इसी दिन डीएनए एक्सट्रैक्शन एवं हैंड्स-ऑन एक्टिविटी, पारंपरिक एवं वैकल्पिक चिकित्सा प्रणाली पर की-नोट व्याख्यान, क्विज प्रतियोगिता तथा वायु गुणवत्ता पर विशेषज्ञ वार्ता एवं लाइव प्रदर्शन आयोजित किए गए। सायंकाल उच्च क्षमता वाले टेलीस्कोप के माध्यम से अंतरिक्ष अवलोकन (टेलीस्कोप शो) भी कराया गया।

समारोह में सचिव विज्ञान भारती मगेन्द्र शर्मा सहित विभागीय अधिकारीगण, विद्यार्थी, शिक्षक और आम नागरिक उपस्थित रहे।

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