राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि लोक है तो आलोक है और लोक कला जीवन का असली आलोक है क्योंकि इसमें कोई बनावट नहीं, नैसर्गिकता है। राज्यपाल श्री बागडे रविवार को केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय के तहत पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर की ओर से हवाला स्थित शिल्पग्राम में आयोजित हो रहे दस दिवसीय ‘शिल्पग्राम उत्सव’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
राज्यपाल ने समारोह में अन्य अतिथियों के साथ दीप प्रज्वलित कर समारोह का तथा नगाड़ा बजाकर शिल्पग्राम उत्सव का आगाज किया। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों सहित सभी का आह्वान किया कि बच्चों को कला एवं संस्कृति की शिक्षा दें, उन्हें मंच पर मौका दें ताकि वे लोक संस्कृति को आगे बढ़ा सकें और इसे संरक्षित कर सकें।

उन्होंने बचपन में मिले प्रोत्साहन से महान शिल्पकार बनने के संबंध में सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” बनाने वाले राम वी. सुतार का उदाहरण भी दिया।
समारोह में कोरियोग्राफिक प्रस्तुति में गोवा के देखनी व घोड़े मोदनी, मणिपुर के लैहारोबा, कश्मीर के राउफ, राजस्थान के लाल आंगी व चरी, कर्नाटक के पूजा कुनिता व ढालू कुनिता, महाराष्ट्र के सोंगी मुखौटा, पंजाब के लुड्डी, तथा गुजरात के तलवार रास व राठवा नृत्यों का महासंगम दर्शकों के दिलों को झंकृत किया। दिल्ली के प्रसिद्ध कोरियोग्राफर सुशील शर्मा के निर्देशन में तैयार इस विशेष प्रस्तुति में मंच पर देशभर की संस्कृतियों का अनूठा संगम देख दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।

कथक-लावणी का फोक-क्लसिकल फ्यूजन छाया —
समारोह में श्रद्धा सतवीडकर के मराठी लावणी लोक नृत्य के साथ नितिन कुमार के भारतीय शास्त्रीय नृत्य कथक की खूबसूरत सिंफनी में क्लासिकल और फोक का अनूठा संगम देख दर्शकों ने तालियों से शिल्पग्राम गूंजा दिया। डांसर्स के कॉस्टयूम्स व लयकारी को देख दर्शक कई मर्तबा वाह-वाह कर उठे।

समारोह में डॉ. कोमल कोठारी स्मृति लाइफटाइम अचीवमेंट लोक कला पुरस्कार राजकोट (गुजरात) के डॉ. निरंजन वल्लभभाई राज्यगुरु और जयपुर (राजस्थान) के रामनाथ चौधरी को प्रदान किया गया। इस पुरस्कार में प्रत्येक को एक रजत पट्टिका के साथ ही 2.51 लाख रुपए की राशि प्रदान की गई। पुरस्कृत जयपुर के रामनाथ चौधरी अल्गोजा नाक से बजाने वाले दुनिया के अकेले कलाकार हैं। वहीं, राजकोट (गुजरात) के डॉ. निरंजन वल्लभभाई राज्यगुरु ने लोक एवं भक्ति संगीत पर फील्ड वर्क कर 700 घंटे का ध्वनि मुद्रांकन किया है।
समारोह में पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि यह सांस्कृतिक महोत्सव एक भारत-श्रेष्ठ भारत का जीवंत प्रतीक है। ऐसे मेले देश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को आगे ले जाने में महती भूमिका निभाते हैं। मेले के इस स्वरूप में सभी आयु वर्ग वालों को कुछ न कुछ अवश्य मिलता है।


