राजस्थान की विश्व प्रसिद्ध सांभर साल्ट लेक इन दिनों प्रकृति के एक अद्भुत चमत्कार का गवाह बन रही है। जयपुर के पास स्थित यह विशाल खारी झील हजारों प्रवासी फ्लेमिंगो पक्षियों के आगमन से ‘गुलाबी समंदर’ में तब्दील हो गई है। झील में ग्रेटर और लेसर फ्लेमिंगो के बड़े-बड़े झुंड दिखाई दे रहे हैं, जिससे यह इलाका पक्षी प्रेमियों, पर्यटकों और फोटोग्राफरों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है।
सांभर झील सेंट्रल एशियन फ्लाईवे पर स्थित है, जिसके चलते हर साल अक्टूबर से मार्च के बीच यहां प्रवासी पक्षियों का आगमन होता है। रूस, साइबेरिया और मंगोलिया जैसे देशों से आने वाले फ्लेमिंगो हजारों किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर यहां सर्दियां बिताने पहुंचते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस साल अनुकूल मौसम, झील में पानी का अच्छा स्तर और भोजन की पर्याप्त उपलब्धता के कारण पक्षियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।
बर्ड एक्सपर्ट गौरव दाधीच ने बताया कि सांभर झील में माइग्रेशन आमतौर पर अक्टूबर में शुरू होता है और मार्च तक चलता है। इस दौरान लेसर और ग्रेटर फ्लेमिंगो के साथ-साथ कई प्रजातियों की बत्तखें और अन्य प्रवासी पक्षी भी यहां देखे जाते हैं। दाधीच के अनुसार, पिछले 12 वर्षों के अध्ययन में उन्होंने इस क्षेत्र में 300 से अधिक पक्षी प्रजातियों को डॉक्यूमेंट किया है। इस वर्ष अच्छी बारिश ने झील में आदर्श परिस्थितियां बना दी हैं, जिससे लगभग 2 से 2.5 लाख फ्लेमिंगो के मौजूद होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
फ्लेमिंगो से सजी यह गुलाबी झील पर्यटकों के लिए किसी जादुई दृश्य से कम नहीं है। झील का विशाल पैनोरमिक व्यू और गुलाबी रंग की छटा इसे एक नेचुरल टूरिज्म हॉटस्पॉट बना रही है। सांभर झील का यह नज़ारा न सिर्फ प्रकृति की सुंदरता को दर्शाता है, बल्कि जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को भी रेखांकित करता है।


