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Reading: पत्रकारिता के अतीत के साथ हमारी गौरवमय ज्ञान परंपरा से भी विद्यार्थी जुड़े,समाचार के साथ विचार संस्कृति का भी हो विकास -राज्यपाल
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पत्रकारिता के अतीत के साथ हमारी गौरवमय ज्ञान परंपरा से भी विद्यार्थी जुड़े,समाचार के साथ विचार संस्कृति का भी हो विकास -राज्यपाल

Last updated: 25.03.2026 5:40 pm
Anjali Dadhich
Published: 25.03.2026

राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने कहा कि पत्रकारिता और जनसंचार शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों को चाहिए कि वे पत्रकारिता के भारतीय अतीत के साथ हमारी गौरवमय ज्ञान-परम्परा से भी जुड़े। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में समाचार के साथ विचार-संस्कृति की शिक्षा का भी प्रसार होना चाहिए। उन्होंने आजादी आंदोलन में पत्रकारिता की रही भूमिका के साथ गणेश शंकर विद्यार्थी, विजय सिंह पथिक, कर्पूर चंद्र कुलिश, बिशन सिंह शेखावत आदि को याद करते हुए पत्रकारिता और जनसंचार शिक्षा के प्रभावी प्रसार का आह्वान किया।

राज्यपाल बागडे बुधवार को हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता का मैं पक्षधर हूं पर पत्रकारिता और जनसंचार शिक्षा में यह सीख भी दी जाए कि स्वतत्रंता स्वच्छंदता नहीं है। उन्होंने स्वस्थ पत्रकारिता मूल्यों के लिए भावी पत्रकार तैयार किए जाने पर जोर दिया।

राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक उपलब्धि का उत्सव नहीं, बल्कि जीवन में नई शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने गुरुकुल परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा पूर्ण होने के बाद शिष्यों को सत्य, धर्म और विनम्रता का पालन करने की सीख दी जाती थी। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे प्राप्त ज्ञान का अहंकार न करते हुए समाज के कल्याण के लिए उसका उपयोग करें।

राज्यपाल ने भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का उल्लेख करते हुए कहा कि रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथ आज भी हमें नैतिकता और जीवन मूल्यों की शिक्षा देते हैं। उन्होंने राजस्थान की पत्रकारिता परंपरा का स्मरण करते हुए कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य सदैव सत्य को सामने लाना और समाज को जागरूक करना रहा है। 

इस अवसर पर राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी मुख्य अतिथि तथा उपमुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि विश्वास अर्जित करने का भी क्षण है। यह जीवन का वह मोड़ है जहां से नई दिशा और जिम्मेदारी शुरू होती है। उन्होंने 1975 के आपातकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाया गया, लेकिन सशक्त पत्रकारिता ने सत्य की रक्षा की। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक मिशन है। आज के दौर में जब डिजिटल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने परिदृश्य को तेजी से बदला है, अब फेक न्यूज की चुनौती भी बढ़ी है। ऐसे में पत्रकारों को सबसे पहले नहीं, बल्कि सबसे सही बनने की होड़ रखनी चाहिए। उन्होंने क्षेत्रीय भाषाओं के महत्व पर बल देते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ आगे बढ़ना आवश्यक है।

विशिष्ट अतिथि उप मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि आज का दिन विद्यार्थियों के परिश्रम और संघर्ष को औपचारिक मान्यता मिलने का दिन है। उन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानी एवं पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी को स्मरण करते हुए कहा कि पत्रकारिता समाज का दर्पण और जनचेतना का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि पहले पत्रकारिता का स्वरूप मुख्यतः प्रिंट मीडिया तक सीमित थाए लेकिन आज डिजिटल माध्यमों ने इसे व्यापक और त्वरित बना दिया है। इसके बावजूद हर वायरल खबर सत्य नहीं होतीए इसलिए पत्रकारिता की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने पेशे के मूल्यों-निष्पक्षता, सत्यनिष्ठा और वस्तुनिष्ठता को बनाए रखें तथा देश के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

दीक्षांत समारोह में वर्ष 2024 एवं 2025 में अंतिम परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले कुल 271 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें स्नातक एवं स्नातकोत्तर के 269 विद्यार्थी तथा 2 शोधार्थी शामिल रहेए जिन्हें पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। शैक्षणिक उत्कृष्टता के आधार पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले 12 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया, जबकि प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले कुल 35 विद्यार्थियों को वरीयता प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।

कुलगुरु प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय ने विश्वविद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए संस्थान की शैक्षणिक उपलब्धियों, नवाचारों एवं भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय मीडिया एवं जनसंचार के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण, समकालीन एवं व्यावहारिक शिक्षा प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

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