प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों में स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रहीं। ज्यादातर निजी अस्पतालों ने जीवन रक्षा के दृष्टिगत आपातकालीन एवं अन्य जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं जारी रखीं। साथ ही, सरकारी अस्पतालों में राज्य सरकार की प्रभावी व्यवस्था एवं सतत निगरानी के कारण रोगियों को सुगमता से उपचार मिला। प्रदेश के निजी एवं सरकारी अस्पतालों में राज्य सरकार की दोनों प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना एवं आरजीएचएस योजना में मंगलवार को करीब 20 हजार रोगियों ने उपचार प्राप्त किया।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि एक निजी अस्पताल संचालक की गिरफ्तारी के विरोध में निजी अस्पतालों ने हड़ताल की घोषणा की है, लेकिन हर रोगी को प्राथमिकता के साथ निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं। ज्यादातर निजी अस्पतालों ने भी मंगलवार को इमरजेंसी सहित जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं जारी रखी हैं। मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना एवं आरजीएचएस योजना के अंतर्गत बड़ी संख्या में मरीजों को उपचार मिला है। राजकीय चिकित्सा संस्थानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हड़ताल के दौरान रोगी भार बढ़ने की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सभी वैकल्पिक व्यवस्थाओं की तैयारी रखें। किसी भी रोगी को उपचार के लिए परेशान नहीं होना पड़े।
राजस्थान स्टेट हैल्थ एश्यारेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल ने बताया कि मंगलवार शाम तक आरजीएचएस योजना में करीब 11 हजार रोगियों ने उपचार प्राप्त किया। ओपीडी में करीब 10 हजार एवं आईपीडी और डे केयर में करीब 1 हजार रोगियों ने उपचार प्राप्त किया। इसी प्रकार मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत करीब 9 हजार रोगियों ने उपचार प्राप्त किया। इनमें से करीब 3 हजार रोगियों ने निजी एवं लगभग 6 हजार रोगियों ने सरकारी अस्पतालों में उपचार प्राप्त किया। इस प्रकार सामान्य दिनों की तरह ही आमजन को चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि मा योजना के अंतर्गत विभिन्न 10 प्रमुख विशेषज्ञताओं जैसे जनरल मेडिसिन, नेफ्रोलॉजी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, स्त्री एवं प्रसूति रोग, आर्थोपेडिक्स, बाल चिकित्सा प्रबंधन, जनरल सर्जरी, इमरजेंसी पैकेज, नवजात देखभाल, यूरोलॉजी में करीब 5 हजार उपचार दर्ज किए गए।
राज्य सरकार ने सभी निजी अस्पतालों से अपील भी की है कि वे मानव सेवा एवं जीवन रक्षा के दायित्व को सर्वोपरि रखते हुए स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रखें।


