मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच भारत सरकार ने घरेलू गैस आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने देशभर में ESMA (आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम) लागू कर दिया है, ताकि एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके और संभावित संकट से निपटा जा सके।
दरअसल, अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं तक एलपीजी की नियमित आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं।
सरकार ने एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग अवधि को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया है। इसका उद्देश्य जमाखोरी को रोकना और बाजार में अनावश्यक घबराहट के कारण बढ़ती मांग को नियंत्रित करना है। अधिकारियों के अनुसार, मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के कारण लोगों में आपूर्ति बाधित होने की आशंका पैदा हो गई थी, जिसके चलते एलपीजी सिलेंडरों की बुकिंग में अचानक 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई।
ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि देश में एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है और फिलहाल किसी प्रकार की कमी नहीं है। सरकार केवल एहतियात के तौर पर कदम उठा रही है ताकि बाजार में संतुलन बना रहे और उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
ESMA लागू होने के बाद रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को एलपीजी का उत्पादन अधिकतम करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही प्रमुख हाइड्रोकार्बन स्रोतों को एलपीजी पूल में भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि घरेलू खाना पकाने की गैस की आपूर्ति बाधित न हो।

अधिकारियों ने बताया कि सामान्य तौर पर एक भारतीय परिवार सालभर में 14.2 किलोग्राम के लगभग 7 से 8 एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करता है। आमतौर पर एक सिलेंडर की रिफिलिंग के लिए करीब छह सप्ताह का समय लगता है, इसलिए बुकिंग अवधि बढ़ाने का निर्णय आपूर्ति प्रबंधन के लिहाज से लिया गया है।
इस बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर भी सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल आम लोगों को राहत दी जाएगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर होने के बावजूद अभी खुदरा ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी तेल विपणन कंपनियां फिलहाल लागत के दबाव को खुद वहन करेंगी।
सरकार ने यह भी बताया कि भारत के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का करीब 74 दिनों का रणनीतिक भंडार उपलब्ध है। यह भंडारण क्षमता किसी भी भू-राजनीतिक संकट या आपूर्ति में संभावित बाधा के दौरान देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हो सकती है।
कुल मिलाकर, वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका के बीच केंद्र सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और समय-समय पर ऐसे कदम उठा रही है ताकि देश में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल जैसी जरूरी ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति सुचारु रूप से जारी रह सके।


