मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में 168वीं राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की समीक्षा बैठक आयोजित हुई । बैठक में राज्य की बैंकिंग प्रगति, प्राथमिकता क्षेत्र ऋण वितरण, विभिन्न सरकारी प्रायोजित योजनाओं की प्रगति, जिला स्तरीय ऋण प्रवाह की स्थिति तथा साइबर सुरक्षा तंत्र की समीक्षा की गई।
बैठक में मुख्य सचिव ने कृषि एवं एमएसएमई क्षेत्रों में संतोषजनक उपलब्धियों की सराहना करते हुए स्वरोजगार योजनाओं में लंबित प्रकरणों, जिलों में असमान CD अनुपात तथा बढ़ती साइबर धोखाधड़ी की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बैंकों द्वारा राज्य की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप ऋण प्रवाह सुनिश्चित करते हुए प्रभावी निगरानी एवं उत्तरदायित्व तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए।
उन्होंने निर्देश दिये कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित साइबर सुरक्षा मानकों एवं प्रोटोकॉल का कठोर अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। संदिग्ध खातों की तत्काल पहचान एवं फ्रीजिंग, रियल-टाइम मॉनिटरिंग तथा डिजिटल सुरक्षा के संबंध में चलाये जा रहे। जन-जागरूकता अभियानों को प्राथमिकता दी जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार एवं बैंकों के मध्य सतत समन्वय, पारदर्शी एवं अनुशासित निगरानी तथा रणनीतिक ऋण वितरण के सहयोग से समावेशी विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति संभव होगी और ‘विकसित राजस्थान@2047’ के संकल्प को साकार किया जा सकेगा।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिये कि राज्य के सभी जिलों, विशेषकर नवीन एवं कम प्रदर्शन वाले जिलों के CD अनुपात की समग्र समीक्षा कर समयबद्ध सुधारात्मक कार्ययोजना तैयार की जाए तथा उसकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। ‘विकसित राजस्थान@2047’ के लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु वर्ष 2030, 2035, 2040 एवं 2047 के लिए लघु, मध्यम एवं दीर्घकालिक संरचित ऋण योजनाएँ तैयार कर आगामी बैठकों में प्रस्तुत की जाए। उन्होंने PM Vishwakarma, PMFME ( प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना) PM Surya Ghar, NRLM (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) PM SVANidhi, MNSUPY तथा BRUPY के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों का अधिकतम 30 दिवस की अवधि में निस्तारण सुनिश्चित किये जाने के निर्देश देते हुए कहा कि 90 दिवस से अधिक लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता से निराकरण करते हुए संबंधित अधिकारियों/बैंकों की उत्तरदायित्व निर्धारित हो।
बैठक में बताया गया कि दिसंबर 2025 की स्थिति के अनुसार राज्य में कुल 9,376 बैंक शाखाएँ संचालित हैं। राज्य में कुल जमा 8.05 लाख करोड़ रूपये तथा कुल ऋण वितरण 8.10 लाख करोड़ रूपये रहा, जिससे ऋण-जमा अनुपात (CD Ratio) 100.70 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है।


