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राजस्थान विधानसभा की 75 वर्षीय यात्रा लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रेरक उदाहरण – उपराष्ट्रपति

Last updated: 16.07.2026 11:48 am
Anjali Dadhich
Published: 16.07.2026

राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में बुधवार को सांय ‘विधायी गौरव यात्रा’ के अंतर्गत आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों की श्रृंखला का भव्य समापन विधानसभा परिसर में हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने इसे लोकतांत्रिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताते हुए कहा कि इस अवसर पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रदर्शित एकता अत्यंत सुखद, प्रेरणादायक और भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राजस्थान वीरता, शौर्य, त्याग, सम्मान और कर्तव्य की भूमि है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों का विश्वास केवल उनके कार्यों के माध्यम से ही जीत सकते हैं। एक जनप्रतिनिधि के लिए जनसेवा को सर्वोच्च लक्ष्य बताते हुए उन्होंने कहा कि राजस्थान विधानसभा के अनेकों सदस्यों ने केवल जनकल्याण के उद्देश्य से कार्य किया है। उन्होंने कहा कि पूर्व और वर्तमान विधायकों का एक साथ बैठना लोकतंत्र की समृद्ध परंपरा का प्रतीक हैं।

जनप्रतिनिधि सदन और जनता, दोनों के प्रति रहें उत्तरदायी- 

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है बल्कि जनता के प्रति निरंतर उत्तरदायित्व निभाने का माध्यम है। प्रत्येक विधायक को सदन की कार्यवाही में पूरी तैयारी के साथ भाग लेना चाहिए तथा जिन समितियों का वह सदस्य है, उनकी बैठकों में भी गंभीरता और सक्रियता के साथ अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि संसदीय समितियां लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार हैं और इनके माध्यम से नीतियों एवं योजनाओं पर गहन विचार-विमर्श होता है। इसलिए जनप्रतिनिधियों का इन समितियों में सक्रिय योगदान लोकतंत्र को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाता है। उन्होंने कहा कि विधायक सदैव अपने क्षेत्र की जनता के लिए सहज उपलब्ध रहें तथा उनकी समस्याओं को समझकर उनके समाधान के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य करें। लोकतंत्र में जनता का विश्वास ही सबसे बड़ी पूंजी है और यह विश्वास निरंतर संवाद, पारदर्शिता और जनसेवा के माध्यम से ही मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह आयोजन लोकतांत्रिक परंपराओं के प्रति सम्मान और निरंतरता का परिचायक है।

भारतीय लोकतंत्र की जड़ें हमारी प्राचीन संस्कृति में निहित- 

राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि भारत में लोकतंत्र कोई नई व्यवस्था नहीं है बल्कि इसकी जड़ें हमारी प्राचीन संस्कृति और सभ्यता में गहराई से समाहित हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत में विभिन्न गणराज्यों और जनपदों में सामूहिक निर्णय लेने की परंपरा विद्यमान थी, जो भारतीय लोकतांत्रिक चेतना की ऐतिहासिक विरासत को दर्शाती है। भारतीय लोकतंत्र की यही मजबूत नींव आज भी देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ बनाए हुए है। वर्तमान समय में सोशल मीडिया पर संवाद का स्तर लगातार गिरता जा रहा है, जिस पर गंभीरता से विचार करने और आवश्यक निगरानी रखने की आवश्यकता है। समाज में स्वस्थ संवाद, शालीनता और नैतिक मूल्यों का संरक्षण लोकतंत्र की मजबूती के लिए अत्यंत आवश्यक है। लोकतंत्र केवल अधिकारों का ही नहीं बल्कि कर्तव्यों और मर्यादाओं का भी नाम है। राज्यपाल ने भारत की समृद्ध संसदीय परंपराओं और संसदीय इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को सदैव इन परंपराओं का सम्मान करते हुए लोकतांत्रिक गरिमा बनाए रखनी चाहिए।

विधानसभा की 75 वर्षीय लोकतांत्रिक यात्रा प्रेरणादायी- 

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित विधायी गौरव यात्रा के समापन सत्र में कहा कि यह आयोजन लोकतंत्र के अनुभव, समृद्ध परंपराओं और मूल्यों का संगम है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। राजस्थान विधानसभा ने पिछले 75 वर्षों में अनेक ऐतिहासिक निर्णय लेकर प्रदेश के विकास और जनकल्याण की दिशा तय की है तथा तकनीक, पारदर्शिता और जनसहभागिता को बढ़ावा देते हुए देश की अन्य विधानसभाओं के लिए भी प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर विशेष कैलेंडर और दैनंदिनी के प्रकाशन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक परंपराओं को जोड़ने का अभिनव प्रयास है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व एवं वर्तमान जनप्रतिनिधियों ने जनसेवा के माध्यम से सदन की गरिमा को निरंतर बढ़ाया है तथा लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति जनकल्याण के उद्देश्य से मिलकर कार्य करना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय लोकतंत्र को जनभागीदारी, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की नई दिशा दी है तथा राज्य सरकार भी इसी भावना के साथ सुशासन के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विकसित राजस्थान-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में विधानसभा की महत्वपूर्ण भूमिका रेखांकित करते हुए युवाओं से संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और संसदीय परंपराओं को समझकर उनसे प्रेरणा लेने का आह्वान किया। इस अवसर पर पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया, राजस्थान के संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल तथा नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित अनेक जनप्रतिनिधि, पूर्व विधायक, वर्तमान विधायक एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

75 वर्षों की उपलब्धियों से प्रेरित होकर भविष्य की ओर बढ़े राजस्थान- 

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि विक्रम संवत 2006 की चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को राजस्थान विधानसभा का उदघाटन हुआ था और तब से लेकर आज तक सदन ने लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त करने तथा जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि पिछले 75 वर्षों में विधानसभा ने विधायी प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया है तथा समाज को अधिक न्यायपूर्ण और समतामूलक बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि ‘विधायी गौरव यात्रा’ केवल एक समारोह नहीं बल्कि विचारों, अनुभवों और लोकतांत्रिक मूल्यों का ऐसा मंच है, जहां विभिन्न पीढ़ियों के जनप्रतिनिधि एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकते हैं।

अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि लोकतंत्र एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें निरंतर सुधार और नवाचार की आवश्यकता होती है। यदि जनहित के मुद्दों पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर कार्य किया जाए तो राजस्थान का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने विधानसभा में किए गए नवाचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि कार्यों के डिजिटलीकरण, आमजन के लिए खुले डिजिटल संग्रहालय, विधानसभा के 75 वर्षों के अभिलेखों के डिजिटलीकरण तथा विधानसभा परिसर में विकसित हर्बल वाटिका जैसी पहलें विधानसभा को आधुनिक स्वरूप प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में भी राजस्थान विधानसभा लोकतांत्रिक परंपराओं को और अधिक समृद्ध करते हुए सुशासन एवं जनकल्याण की दिशा में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगी।

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