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राजस्थान सरकार ने साइबर सुरक्षा को लेकर जारी की एडवाइजरी, “डिजिटल अरेस्ट” और कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम से सतर्क रहने की अपील

Last updated: 09.02.2026 5:22 pm
Anjali Dadhich
Published: 09.02.2026

राजस्थान सरकार द्वारा साइबर सुरक्षा और साइबर स्वच्छता के प्रति आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की गई है। एडवाइजरी के माध्यम से “डिजिटल अरेस्ट” और कॉल फ़ॉरवर्डिंग घोटालों की घटनाओं को रोकने के लिए आमजन को जागरूक किया गया है।

डिजिटल अरेस्ट घोटाला क्या है –

डिजिटल अरेस्ट घोटाले (ठगी) में साइबर अपराधी खुद को पुलिस, CBI, प्रवर्तन निदेशालय, नारकोटिक्स विभाग या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। वे फोन या वीडियो कॉल के जरिए फर्जी कानूनी मामलों की धमकी देकर पीड़ितों से पैसे ऐंठते हैं।

ठगी कैसे की जाती है –

ठग IVR कॉल, फोन या वीडियो कॉल के जरिए संपर्क करते हैं और खुद को पुलिस, CBI, ED, FBI या दूरसंचार विभाग का अधिकारी बताते हैं। कई बार फर्जी पुलिस स्टेशन, वर्दी और बैकग्राउंड का भी इस्तेमाल किया जाता है। पीड़ितों पर FedEx/DHL जैसी कूरियर कंपनियों से नशीले पदार्थ, नकली पासपोर्ट या अवैध सिम भेजने, आधार या बैंक खातों के दुरुपयोग, मनी लॉन्ड्रिंग या आतंकवादी फंडिंग जैसे गंभीर आरोप लगाए जाते हैं। कुछ मामलों में परिवार के सदस्य को दुर्घटना या अपराध में फंसाने की बात कही जाती है। पीड़ितों को Skype या WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म पर लगातार वीडियो कॉल में बने रहने को मजबूर किया जाता है, ताकि वे किसी और से संपर्क न कर सकें। और मामला निपटाने, गिरफ्तारी से बचाने, मीडिया में नाम न आने देने, जुर्माना या सत्यापन शुल्क के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं।

जरूरी बातें याद रखें –

कोई भी कानून प्रवर्तन एजेंसी डिजिटल रूप से गिरफ्तारी नहीं करती। कोई सरकारी अधिकारी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे की मांग नहीं करता। WhatsApp, Skype या Telegram पर कोई जांच नहीं होती।


कॉल फ़ॉरवर्डिंग स्कैम से भी रहें सावधान

एडवाइजरी में कॉल फ़ॉरवर्डिंग स्कैम को भी गंभीर खतरा बताया गया है। इसमें अपराधी कूरियर या डिलीवरी एजेंट बनकर कॉल करते हैं और पीड़ित से एक USSD कोड डायल करवा लेते हैं।

यह ठगी कैसे होती है –

ठग पार्सल कन्फर्मेशन या री-शेड्यूलिंग के बहाने संपर्क करते हैं और SMS के जरिए 21, 61 या 67 से शुरू होने वाला USSD कोड डायल करने को कहते हैं। कोड डायल करते ही कॉल फ़ॉरवर्डिंग एक्टिव हो जाती है और बैंक सत्यापन कॉल, OTP और WhatsApp/Telegram वेरिफिकेशन कॉल सीधे ठग के पास चली जाती हैं। इससे बैंक अकाउंट, डिजिटल वॉलेट और सोशल मीडिया अकाउंट हैक होने का खतरा बढ़ जाता है।

बचाव के उपाय

किसी अज्ञात या संदिग्ध व्यक्ति द्वारा बताए गए USSD कोड कभी डायल न करें। सभी कॉल फ़ॉरवर्डिंग तुरंत बंद करने के लिए ##002# डायल करें। SMS, WhatsApp या ईमेल से आए किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें। डिलीवरी या कूरियर की जानकारी केवल संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत हेल्पलाइन से ही सत्यापित करें।

ग़ृह विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें, किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश पर तुरंत प्रतिक्रिया न दें और साइबर अपराध की स्थिति में नजदीकी पुलिस थाना या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। ऑनलाइन शिकायत: cybercrime.gov.in पर जाएं। साइबर व्हाट्सएप नंबर (राजस्थान पुलिस) 9256001930 और वित्तीय नुकसान होने पर, जितनी जल्दी हो सके (24 घंटे के भीतर) रिपोर्ट करें।

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