सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमलया की बेंच ने कहा कि नियमों के कुछ प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनका दुरुपयोग होने की संभावना है। कोर्ट ने केंद्र और UGC को नोटिस जारी किया और नियमों का ड्राफ्ट फिर से तैयार करने के निर्देश दिए।
CJI सूर्यकांत ने केंद्र से सवाल किया कि हम जातिविहीन समाज की दिशा में कितना प्रगति कर चुके हैं, क्या अब हम उल्टी दिशा में जा रहे हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पीड़ितों को न्याय से वंचित नहीं छोड़ा जा सकता। कोर्ट का कहना था कि जनरल कैटेगरी की शिकायतों की चिंता नहीं है, हमारी प्राथमिकता आरक्षित समुदायों के लिए निवारण प्रणाली की सुरक्षा है। इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।
UGC के नए नियमों के खिलाफ मृत्युंजय तिवारी, एडवोकेट विनीत जिंदल और राहुल दीवान ने याचिकाएं दायर की हैं। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि UGC ने जाति आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई है और कुछ समुदायों को संस्थागत संरक्षण से बाहर रखा गया है। UGC ने 13 जनवरी को नए नियमों को नोटिफाई किया था, जिनका नाम है “Promotion of Equity in Higher Education Institution Regulations, 2026”।
नए नियमों के तहत कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाई जाएंगी। इन टीमों का काम SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखना और उनका समाधान करना होगा। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए किए गए हैं।



