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Reading: 125 साल बाद लौटी भारत की अमूल्य विरासत: भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की वापसी पर पीएम मोदी के भावुक शब्द
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125 साल बाद लौटी भारत की अमूल्य विरासत: भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की वापसी पर पीएम मोदी के भावुक शब्द

Last updated: 03.01.2026 5:02 pm
Anjali Dadhich
Published: 03.01.2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र अवशेषों की भारत वापसी को ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि इन अवशेषों को अपने बीच पाकर पूरा देश स्वयं को धन्य महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि लगभग 125 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भारत की अमूल्य विरासत वापस लौटी है। यह सिर्फ अवशेषों की वापसी नहीं, बल्कि इतिहास से मिले एक बड़े सबक की भी याद दिलाती है कि गुलामी के काल में हमारी आस्था और धरोहर को किस तरह छीना गया।

पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिटिश काल में भगवान बुद्ध के ये पवित्र अवशेष भारत से बाहर ले जाए गए थे। जिन लोगों ने इन्हें अपने साथ ले जाया, उनके लिए ये सिर्फ एंटीक या ऐतिहासिक वस्तुएं थीं। इसी सोच के कारण इन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में नीलाम करने की कोशिश भी हुई। लेकिन भारत ने यह संकल्प लिया कि वह इन पवित्र अवशेषों की नीलामी नहीं होने देगा। प्रधानमंत्री ने इस ऐतिहासिक प्रयास में सहयोग के लिए गोदरेज समूह का आभार व्यक्त किया और कहा कि उनके सहयोग से यह संभव हो पाया कि बुद्ध की भूमि पर ये अवशेष फिर से लौट सके।

दरअसल, वर्ष 1898 में उत्तर प्रदेश के पिपरहवा (कपिलवस्तु क्षेत्र) में खुदाई के दौरान भगवान बुद्ध के अवशेष मिले थे। यह खुदाई ब्रिटिश शासन के दौरान डब्ल्यू. सी. पेपे द्वारा कराई गई थी, जो उस समय एक ब्रिटिश इंजीनियर थे। उसी दौर में ये अवशेष भारत से बाहर भेज दिए गए थे। अब इन्हें वापस लाकर दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में आयोजित ‘पवित्र पिपरहवा अवशेष’ प्रदर्शनी में रखा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं इस प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने तीन महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। पहली, भगवान बुद्ध का ज्ञान पूरी मानवता का है। उन्होंने कहा कि बीते कुछ महीनों में यह भाव दुनिया भर में स्पष्ट रूप से देखने को मिला। जिन- जिन देशों में ये अवशेष ले जाए गए, वहां आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। थाईलैंड में इन अवशेषों के दर्शन 40 लाख से अधिक लोगों ने किए। मंगोलिया में हजारों लोग घंटों प्रतीक्षा करते रहे और कई लोग भारतीय प्रतिनिधियों को छूना चाहते थे, क्योंकि वे बुद्ध की भूमि से आए थे। रूस में भी लाखों लोगों ने इनके दर्शन किए। पीएम मोदी ने कहा—भगवान बुद्ध सबके हैं और बुद्ध पूरी दुनिया को जोड़ते हैं।

दूसरी बात साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे स्वयं को भाग्यशाली मानते हैं कि भगवान बुद्ध का उनके जीवन में गहरा स्थान रहा है। जब वे सरकारी जिम्मेदारियों से दूर थे, तब भी उन्होंने बौद्ध तीर्थस्थलों की यात्रा की। नेपाल के लुंबिनी में माया देवी मंदिर जाना उनके लिए एक अद्भुत अनुभव रहा। जापान, चीन और मंगोलिया में भी उन्होंने लोगों की आंखों में बुद्ध के प्रति गहरा जुड़ाव देखा।

तीसरी बात में पीएम मोदी ने कहा कि वे जहां भी गए, उनका प्रयास रहा कि भगवान बुद्ध की विरासत का कोई प्रतीक भारत लेकर आएं। यह साझा बौद्ध विरासत इस बात का प्रमाण है कि भारत केवल कूटनीति और राजनीति से ही नहीं, बल्कि आस्था और अध्यात्म से भी दुनिया से जुड़ता है। भारत भगवान बुद्ध की परंपरा का जीवंत वाहक है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।

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