राजस्थान विधानसभा के सत्र में गुरुवार को सड़कों के मुद्दे को लेकर जमकर हंगामा हुआ। प्रश्नकाल के दौरान सड़क निर्माण से जुड़े सवाल उठते ही सदन का माहौल गरमा गया और सत्ता पक्ष व विपक्ष आमने-सामने आ गए। इस दौरान तीखी नोकझोंक के चलते कुछ समय के लिए सदन की कार्यवाही भी बाधित रही।
प्रश्नकाल में पीपलदा विधायक चेतन पटेल कोलाना ने अपने विधानसभा क्षेत्र में नॉन-पैचेबल और मिसिंग लिंक सड़कों के निर्माण को लेकर की गई बजट घोषणाओं पर अमल नहीं होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने इस संबंध में पीडब्ल्यूडी मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी से जवाब मांगा।
जवाब देते हुए जैसे ही दीया कुमारी ने मौजूदा सरकार और पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल की तुलना करते हुए सड़क निर्माण से जुड़े आंकड़े पेश करने शुरू किए, कांग्रेस विधायकों ने आपत्ति जताते हुए हंगामा शुरू कर दिया। कांग्रेस का आरोप था कि सरकार तथ्य तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है।
हंगामे के बीच दीया कुमारी ने कहा कि वे केवल कुछ तथ्य रखना चाहती हैं, लेकिन विपक्ष बिना सुने ही विरोध कर रहा है। उन्होंने कांग्रेस विधायकों से कहा, “मैंने यह नहीं कहा कि आपने कुछ नहीं किया, फिर इतनी आक्रामकता क्यों?”
इस दौरान मंत्री अविनाश गहलोत समेत कई भाजपा विधायक भी अपनी सीटों से खड़े हो गए। अविनाश गहलोत ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासनकाल में भाजपा विधायकों की सिफारिश पर एक किलोमीटर सड़क तक स्वीकृत नहीं की गई थी।
दीया कुमारी ने सदन में दावा किया कि पिछली कांग्रेस सरकार ने पांच साल में करीब 13 हजार किलोमीटर नई सड़कें बनाई थीं, जबकि मौजूदा सरकार ने सिर्फ दो साल में 16,864 किलोमीटर नई सड़कों का निर्माण किया है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस शासन में 1104 गांवों को सड़क नेटवर्क से जोड़ा गया, जबकि वर्तमान सरकार ने दो साल में 1700 गांवों को सड़कों से जोड़ दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार ने पांच साल में सड़कों के नवीनीकरण पर 12,300 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि मौजूदा सरकार ने दो साल में ही 8,450 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं। हंगामे के बाद स्थिति सामान्य होने पर प्रश्नकाल की कार्यवाही आगे बढ़ाई गई।


