जयपुर: केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में घोषित कैडर आवंटन नीति 2026 ने राजस्थान के प्रशासनिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। नए नियमों के अनुसार, राजस्थान को ग्रुप-III में रखा गया है, जिसका सीधा असर अब प्रदेश में आने वाले नए अधिकारियों और यहाँ से बाहर जाने वाले आईएएस (IAS) अधिकारियों पर पड़ेगा।
राजस्थान के लिए क्या बदल गया?
‘इनसाइडर’ कोटा हुआ और भी प्रतिस्पर्धी: राजस्थान हमेशा से आईएएस उम्मीदवारों की पहली पसंद रहा है। नए नियमों के तहत, राजस्थान मूल के टॉपर छात्रों को अब अपना होम कैडर (राजस्थान) पाने के लिए ‘ग्रुप रोटेशन’ की कड़ी शर्तों को पूरा करना होगा। यदि राजस्थान में वैकेंसी कम है, तो उन्हें अनिवार्य रूप से ग्रुप-I या ग्रुप-IV के राज्यों (जैसे असम या पश्चिम बंगाल) में भेजा जाएगा।
बाहरी राज्यों के अधिकारियों का बढ़ेगा प्रतिनिधित्व: नई नीति का उद्देश्य राज्यों में ‘आउटसाइडर’ अधिकारियों की संख्या बढ़ाना है। अब राजस्थान कैडर में दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत के अधिकारियों की तैनाती अधिक होगी, जिससे प्रदेश के प्रशासन में एक नई कार्य-संस्कृति देखने को मिलेगी।
कैडर ट्रांसफर अब टेढ़ी खीर: राजस्थान में कार्यरत कई अधिकारी व्यक्तिगत कारणों या विवाह के आधार पर दिल्ली या हरियाणा कैडर में ट्रांसफर की कोशिश करते थे। अब सख्त नियमों के कारण, जब तक जीवनसाथी भी ऑल इंडिया सर्विस में नहीं होगा, राजस्थान छोड़ना लगभग नामुमकिन होगा।
प्रशासनिक दक्षता पर प्रभाव
जयपुर के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस रोटेशन पॉलिसी से राजस्थान के रेगिस्तानी और आदिवासी क्षेत्रों (जैसे जैसलमेर और बांसवाड़ा) में काम करने के लिए विविध अनुभव वाले अधिकारी मिलेंगे। केंद्र का मानना है कि इससे क्षेत्रीयतावाद कम होगा और राष्ट्रीय स्तर की प्रशासनिक समझ बढ़ेगी।
मुख्य सचिव कार्यालय को सख्त निर्देश
कार्मिक विभाग (DoPT) ने राजस्थान सरकार को पाबंद किया है कि वे 31 जनवरी तक राज्य की सभी रिक्तियों का ब्यौरा भेजें। समय पर जानकारी न देने की स्थिति में राजस्थान को इस साल मिलने वाले नए अधिकारियों के कोटे में कटौती की जा सकती है।


