मध्य-पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच युद्ध लगातार तेज होता जा रहा है। अमेरिका भी इस संघर्ष में सक्रिय हो गया है, जिसके कारण यह टकराव क्षेत्रीय युद्ध का रूप लेता दिखाई दे रहा है। गुरुवार को यह संघर्ष छठे दिन में प्रवेश कर गया और दोनों पक्षों की ओर से लगातार मिसाइल और हवाई हमले किए जा रहे हैं।
बड़े हमले और जवाबी कार्रवाई
- इजरायल और अमेरिका ने तेहरान समेत कई सैन्य ठिकानों पर बड़े हवाई हमले किए हैं।
- इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
- कई रॉकेटों को इजरायल की एयर डिफेंस प्रणाली ने हवा में ही मार गिराया, जबकि कुछ हमलों से कई जगह सायरन बजने लगे।
भारी जनहानि
- मानवाधिकार समूहों के अनुसार, युद्ध के पहले कुछ दिनों में 1000 से अधिक लोगों की मौत और हजारों घायल हो चुके हैं।
- कई शहरों में अस्पताल और रिहायशी इलाके भी प्रभावित हुए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी है।
युद्ध की बड़ी वजह
- 28 फरवरी 2026 को ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की एयरस्ट्राइक में मौत के बाद हालात तेजी से बिगड़ गए।
- इसके बाद ईरान ने बदले की कार्रवाई करते हुए मिसाइल हमले शुरू कर दिए और इजरायल ने देश में आपातकाल घोषित कर दिया।
युद्ध का दायरा बढ़ता हुआ
- इजरायल ने लेबनान में भी हमले शुरू किए हैं, जहां हिज़्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है।
- ईरान से जुड़े ड्रोन हमलों की घटनाएं ओमान और खाड़ी क्षेत्र तक फैल गई हैं।
- कई देशों ने अपने एयरस्पेस बंद कर दिए हैं और सैकड़ों उड़ानें रद्द हो गई हैं।
दुनिया पर असर
- युद्ध के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है और सोने-चांदी की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।
- मिडिल-ईस्ट में तनाव के चलते कई देशों में परीक्षाएं और नागरिक उड़ानें भी प्रभावित हुई हैं।
✅ स्थिति का सार:
ईरान-इजरायल युद्ध अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहा। अमेरिका, लेबनान और खाड़ी क्षेत्र की भागीदारी से यह संघर्ष पूरे मध्य-पूर्व को प्रभावित कर रहा है और वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ा रहा है।


