भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की तैयारियों को एक और बड़ी सफलता मिली है। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) ने 10 अप्रैल 2026 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस स्टेशन में दूसरे इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-02) को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह परीक्षण अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस टेस्ट का उद्देश्य क्रू मॉड्यूल की सुरक्षित लैंडिंग और रिकवरी सिस्टम की जांच करना था। इसमें हेलीकॉप्टर या एयरक्राफ्ट से मॉड्यूल को ऊंचाई से गिराकर विभिन्न परिस्थितियों में उसके सिस्टम को परखा जाता है। खासतौर पर पैराशूट सिस्टम की कार्यक्षमता, आपात स्थिति में बैकअप सिस्टम और पानी में लैंडिंग के दौरान मॉड्यूल की स्थिरता को जांचा गया।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस उपलब्धि पर इसरो की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि गगनयान मिशन के लिए यह सफलता बेहद अहम है और भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन अगले साल के लिए निर्धारित है।
इससे पहले पहला एयर ड्रॉप टेस्ट अगस्त 2025 में किया गया था, जिसमें 4.8 टन के डमी क्रू मॉड्यूल को चिनूक हेलीकॉप्टर से लगभग तीन किलोमीटर की ऊंचाई से गिराया गया था। उस दौरान 10 पैराशूट वाले सिस्टम ने मॉड्यूल की गति को नियंत्रित कर सुरक्षित समुद्र में उतार दिया था। IADT-02 में भी इसी प्रक्रिया को दोहराते हुए सिस्टम की विश्वसनीयता को और मजबूत किया गया है।

गगनयान मिशन के तहत भारत पहली बार अपने अंतरिक्ष यात्रियों को लो-अर्थ ऑर्बिट में भेजने की तैयारी कर रहा है। इस मिशन में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, क्योंकि अंतरिक्ष से वापसी सबसे चुनौतीपूर्ण चरण होता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि लगातार सफल हो रहे ये परीक्षण भारत को मानव अंतरिक्ष उड़ान के लक्ष्य के और करीब ले जा रहे हैं। आने वाले समय में और भी महत्वपूर्ण परीक्षण किए जाएंगे, जो इस ऐतिहासिक मिशन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।


