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AI और डीपफेक का बढ़ता खतरा —राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी- सावधान रहें, जल्दबाजी में पैसा ट्रांसफर करने से पहले जरूर करें पुष्टि

Last updated: 17.03.2026 2:23 pm
Anjali Dadhich
Published: 17.03.2026

साइबर अपराधियों ने अब ठगी के लिए नई तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक के माध्यम से अपराधी परिचितों की आवाज और वीडियो की नकल कर लोगों को कॉल कर रहे हैं और आपात स्थिति का बहाना बनाकर पैसे ट्रांसफर करवाने की कोशिश कर रहे हैं। इस तरह के मामलों में आमजन भावनात्मक दबाव में आकर ठगी का शिकार हो रहे हैं। इसको लेकर राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आमजन के लिए विशेष एडवाइजरी जारी कर सतर्क रहने की अपील की है।

क्या है AI और डीपफेक तकनीक —

उपमहानिरीक्षक पुलिस शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ऐसी आधुनिक तकनीक है, जो कंप्यूटर को इंसानों की तरह सोचने, बोलने और काम करने में सक्षम बनाती है। इसी तकनीक की मदद से साइबर अपराधी डीपफेक ऑडियो और वीडियो तैयार करते हैं। ये नकली ऑडियो या वीडियो कॉल बिल्कुल किसी परिचित व्यक्ति की आवाज या चेहरे जैसी लगती है, जिससे सामने वाला व्यक्ति आसानी से भ्रमित हो सकता है। इसके अलावा ठगी और ब्लैकमेलिंग के लिए नकली फोटो और वीडियो क्लिप का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

ऐसे पहचानें साइबर ठगी के संकेत —

साइबर अपराधियों द्वारा की जाने वाली ठगी में कुछ सामान्य संकेत दिखाई देते हैं। यदि कोई व्यक्ति फोन या मैसेज के माध्यम से “अभी पैसे भेजो” या “तुरंत ट्रांसफर करो” जैसे संदेश देता है तो सतर्क हो जाएं। कई बार अपराधी डर, घबराहट या गोपनीयता का हवाला देकर जल्दबाजी में निर्णय लेने के लिए दबाव बनाते हैं। इसके साथ ही ओटीपी, पासवर्ड या बैंक संबंधी जानकारी मांगना भी साइबर ठगी का स्पष्ट संकेत हो सकता है। अक्सर ठग पीड़ित को किसी अन्य व्यक्ति से पुष्टि करने से भी रोकने की कोशिश करते हैं।

खुद को ऐसे रखें सुरक्षित —

राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश या वीडियो पर तुरंत विश्वास न करें। यदि कोई परिचित व्यक्ति पैसे मांगता है तो पहले उसके पहले से ज्ञात मोबाइल नंबर पर सामान्य कॉल करके जानकारी की पुष्टि जरूर करें। ओटीपी, पासवर्ड या बैंक से जुड़ी संवेदनशील जानकारी कभी भी किसी के साथ साझा न करें। सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी, वॉइस नोट या वीडियो अनावश्यक रूप से सार्वजनिक करने से भी बचें।

ठगी होने पर तुरंत करें शिकायत —

यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की साइबर ठगी का शिकार होता है तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाना या साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाएं। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है। सहायता के लिए साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

     राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि तकनीक के इस दौर में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश पर बिना जांच-पड़ताल के विश्वास न करें और साइबर अपराधों के प्रति जागरूक रहकर खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखें।

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