पंच गौरव कार्यक्रम के संरक्षण, संवर्धन एवं विकास के संबंध में जिला कलक्टर संदेश नायक ने कलेक्ट्रेट में बैठक ली। उन्होंने जयपुर जिले की विशिष्ट पाँच पहचान, पंचगौरव एक जिला एक उत्पाद: रत्नाभूषण, एक जिला -एक उपज:आंवला, एक जिला एक वनस्पति प्रजाति: लिसोड़ा, एक जिला-एक खेल: कबड्डी एवं एक जिला एक पर्यटन स्थल: आमेर के संवर्धन, विकास और इससे रोजगार संवर्धन पर विस्तृत समीक्षा की।
जिला कलक्टर ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार पंच गौरव के संरक्षण, संवर्धन एवं विकास के लिए संबंधित विभाग पंच गौरव कार्यक्रम के तहत वर्ष 2026-27 में आयोजित की जाने वाली गतिविधियों का कैलेंडर जारी करें। राज्य सरकार द्वारा आयोजित होने वाले प्रत्येक इवेंट्स, कैम्प, सम्मेलन, कार्यक्रम, समारोह आदि में संबंधित विभागों द्वारा पंच गौरव के हॉर्डिंग्स, स्टैण्डी, बैनर आदि के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जाये। सरकारी व निजी विद्यालयों में प्रतियोगिताएँ व कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों को पंच गौरव से परिचय करवाते हुए समय-समय पर उनके प्रति उनमें जागरूकता पैदा की जाये।
आँवला व लिसोड़ा की मार्केटिंग की जाये—
कलेक्टर ने वन एवं उद्यान विभाग द्वारा लिसोड़ा व आँवले का अधिक से अधिक पौधारोपण कर उनकी सुरक्षा व देखभाल हेतु वृक्ष मित्रों की नियुक्ति के निर्देश दिए। खेल विभाग द्वारा युवाओं को कबड्डी खेल के प्रति आकर्षित करने के उद्देश्य से नियमित रूप से खेल प्रतियोगिताएँ पंचायत, उपखण्ड एवं जिलास्तर पर आयोजित करने, एक जिला एक पर्यटन स्थल आमेर दुर्ग के विकास के लिए बेहतर कनेक्टिविटी, पार्किंग, पेयजल स्वच्छता, साइनेज, बिजली आदि सुविधाओं का विकास कर स्थानीय लोगों को रोजगार प्रदान करने हेतु गाइड का प्रशिक्षण देने, आमेर दुर्ग के इतिहास के संबंध में आम पर्यटकों को जानकारी उपलब्ध कराने हेतु साहित्य का वितरण करने के भी निर्देश दिए।
जिला कलक्टर ने कहा कि एक जिला एक उत्पाद रत्नाभूषण के विकास एवं युवाओं को इस व्यवसाय से जोड़ने के लिए नियमित रूप से कार्यशालाएँ आयोजित की जाएं। उन्होंने ने कहा कि संबंधित विभागों द्वारा जिले के आर्थिक विकास, मूल्यवर्धन, स्थानीय उद्यमिता एवं आजीविका-रोजगार सृजन हेतु पंचगौरव से अधिक से अधिक जिलेवासियों को जोड़ने के निर्देश दिए ताकि पंचगौरव की उपयोगिता सिद्ध हो सके।


