भारतीय ग्रैंडमास्टर वैशाली रमेशबाबू ने शतरंज की दुनिया में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए FIDE महिला कैंडिडेट्स टूर्नामेंट 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया है। 15 अप्रैल को साइप्रस के कैप सेंट जॉर्ज होटल में खेले गए फाइनल राउंड के बाद वैशाली ने पॉइंट्स टेबल में शीर्ष स्थान हासिल किया और टूर्नामेंट जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं।
फाइनल मुकाबले में वैशाली ने सफेद मोहरों से खेलते हुए रूस की अनुभवी खिलाड़ी कैटरिना लग्नो को मात दी। मुकाबले की शुरुआत में लग्नो ने सिसिलियन डिफेंस की ड्रैगन वेरिएशन अपनाई, लेकिन वैशाली ने यूगोस्लाव अटैक के जरिए आक्रामक रणनीति अपनाते हुए शुरुआती दौर से ही मजबूत पकड़ बना ली। करीब 16वीं चाल तक उनके पास स्पष्ट बढ़त थी और उन्होंने बिना जल्दबाजी किए विरोधी की गलतियों का फायदा उठाया। अंततः 48वीं चाल पर लग्नो ने हार मान ली।
टूर्नामेंट का अंतिम राउंड बेहद रोमांचक रहा। आखिरी मुकाबले से पहले वैशाली और कजाकिस्तान की बिबिसारा असौबायेवा 7.5 अंकों के साथ बराबरी पर थीं। हालांकि, असौबायेवा का मुकाबला भारत की दिव्या देशमुख ने ड्रॉ पर रोक दिया, जिससे वैशाली को बढ़त मिली और वे चैंपियन बन गईं।
इस जीत के साथ 24 वर्षीय वैशाली अब चीन की मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन जू वेनजुन को वर्ल्ड चैंपियनशिप में चुनौती देंगी। पिछले एक दशक से महिला शतरंज में चीनी खिलाड़ियों का दबदबा रहा है, ऐसे में वैशाली की यह उपलब्धि बेहद खास मानी जा रही है।
वैशाली का यह सफर आसान नहीं रहा। टूर्नामेंट की शुरुआत में उनके पहले चार मुकाबले ड्रॉ रहे और पांचवें में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, इसके बाद उन्होंने शानदार वापसी करते हुए लगातार बेहतर प्रदर्शन किया और अंततः खिताब अपने नाम कर लिया।
कैंडिडेट्स टूर्नामेंट शतरंज का सबसे महत्वपूर्ण क्वालिफाइंग इवेंट माना जाता है, जो तय करता है कि वर्ल्ड चैंपियन को चुनौती देने वाला अगला खिलाड़ी कौन होगा। इससे पहले भारत के डी गुकेश और विश्वनाथन आनंद भी यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं।
अब पूरे देश को उम्मीद है कि वैशाली रमेशबाबू 2026 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में जीत हासिल कर इतिहास रचेंगी और भारत का नाम रोशन करेंगी।


